News24 के पत्रकार पर 'सामाजिक शांति भंग' करने का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई गिरफ्तारी पर रोक

Update: 2026-06-05 05:09 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को News24 रिपोर्टर शाहनवाज़ को गिरफ़्तारी से अंतरिम राहत दी। उन पर मुरादाबाद में FIR दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप था कि उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो रीपोस्ट करके नगर निगम की आलोचना की थी।

जस्टिस विक्रम डी. चौहान और जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की बेंच ने निर्देश दिया कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक पत्रकार के ख़िलाफ़ कोई सख़्त कार्रवाई न की जाए, बशर्ते वह जांच में सहयोग करें।

बेंच ने एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट को इस मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए 2 हफ़्ते का समय भी दिया।

संक्षेप में मामला

यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352(2) [शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना] के तहत दर्ज की गई। यह मामला पत्रकार के X अकाउंट पर पोस्ट किए गए वायरल CCTV वीडियो क्लिप से जुड़ा है। शिकायतकर्ता (अमन) नगर निगम का एक आउटसोर्स सफ़ाई कर्मचारी है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, वीडियो में नगर निगम का एक और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर अजय सुबह-सुबह जानबूझकर डस्टबिन खाली करते और स्थानीय दुकान (जो तलहा की है) के सामने कचरा फैलाते हुए दिख रहा है।

घटना के बाद शिकायतकर्ता का आरोप है कि शाहनवाज़ ने अपने X हैंडल पर वीडियो के साथ एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें "गुमराह करने वाले तथ्य" थे। आरोप है कि इसका मकसद नगर निगम की प्रतिष्ठा को धूमिल करना और समाज में नफ़रत फैलाकर सामाजिक शांति को भंग करना था।

दिलचस्प बात यह है कि FIR में दो अन्य X यूज़र्स को भी आरोपी बनाया गया, जिन्होंने पोस्ट पर कमेंट किया था; उन पर घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने का आरोप है। FIR में अन्य यूज़र्स के जवाबों का भी ज़िक्र है, जैसे: "मुस्लिम को फसाना, साज़िश करना, जेल भेजना, आदि कितना आसान हो गया है?"

राहत की मांग करते हुए वकील आदर्श श्रीवास्तव और रीना पाल ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने केवल वीडियो को रीपोस्ट/शेयर किया, जो पहले से ही उनके X हैंडल पर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है। साथ ही वे उस विवादित कंटेंट के मूल निर्माता नहीं हैं।

इस दलील पर विचार करते हुए बेंच ने निम्नलिखित आदेश पारित किया:

"मामले की अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ता शाहनवाज़ के खिलाफ़ उक्त FIR के संबंध में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, बशर्ते वह जांच में सहयोग करे... याचिकाकर्ता को जांच अधिकारी के समक्ष आवश्यकतानुसार उपस्थित होना होगा और जांच में पूरा सहयोग करना होगा।"

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