मद्रास हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को अपने बच्चे के नामकरण में जाने की अनुमति दी [आर्डर पढ़े]

Update: 2018-06-30 06:29 GMT

जब हिरासत में रह रहे व्यक्ति की पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया है, तो यह किसी भी पत्नी की अपेक्षा होगी कि वह आए और बच्चे को देखे”

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या के एक आरोपी को अपने नवजात के नामकरण में जाने की इजाजत दे दी है। उसे इसके लिए 10 दिन का पैरोल दिया गया है।

न्यायमूर्ति एस विमला और न्यायमूर्ति एस रामतिलगम ने कहा कि यह किसी पत्नी की स्वाभाविक अपेक्षा होगी कि उसका पति अपने नवजात को देखने के लिए आए।

पीठ ने आरोपी के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया जिसमें उसने अपने बेटे को उसके नवजात के पुनियास्थानम और नामकरण समारोह में आने की अनुमति दिए जाने की मांग की थी।

राज्य ने इस आवेदन पर आपत्ति की और इसको निरस्त किए जाने की मांग की और उस समारोह में जेल के किसी प्रतिनिधि को भेजने की दलील दी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि आरोपी की पत्नी ने इससे पहले उसको यह कहते हुए छोड़े जाने की मांग की थी कि प्रसव के समय उसको वहाँ रहने की जरूरत है, पर अधिकारियों ने उसे इसका जवाब भेजना भी उचित न समझा।

पीठ ने कहा कि ऐसा माना जा सकता है कि वर्तमान याचिका पहले दायर की गई याचिका की अगली कड़ी है।

आरोपी को पैरोल पर छोड़ने का आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा, “जब हिरासत में रह रहे व्यक्ति की पत्नी ने अपने बच्चे को जन्म दिया है तो एक पत्नी होने के कारण उसकी यह स्वाभाविक अपेक्षा होगी कि उसका पति बच्चे को देखे और और अगर अनुमति नहीं दी जाती है तो एक महत्त्वपूर्ण समय पर उसको खुशी बख्शने से इनकार करना होगा और जेल में अनुशासन को बनाए नहीं रखा जा सकता है। इसलिए हिरासत में रह रहे व्यक्ति और उसकी पत्नी के मानवाधिकारों को देखते हुए और उस बच्चे के हित में हम हिरासत में बंद आरोपी बाबू को 21 जून 2018 को 10 बजे सुबह से शुरू होकर 30 जून 2018 के 10 बजे रात तक 10 दिन के पैरोल पर छोड़ने का आदेश देते हैं।”


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