180 दिन की समय-सीमा खत्म होने के एक दिन बाद चार्जशीट दाखिल? उड़ीसा हाईकोर्ट ने NDPS मामले में 'डिफ़ॉल्ट ज़मानत' दी
Shahadat
7 Nov 2026 1:22 PM IST

उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत आरोपी को 'डिफ़ॉल्ट ज़मानत' (Default Bail) मिलनी चाहिए, अगर अभियोजन पक्ष 180 दिन पूरे होने से पहले चार्जशीट दाखिल करने में विफल रहता है। साथ ही जांच पूरी करने के लिए विशेष अदालत से समय बढ़ाने की मांग भी नहीं करता है। [2026 LiveLaw (Ori) 124]।
आरोपी/याचिकाकर्ता को राहत देते हुए जस्टिस वी. नरसिंह की बेंच ने NDPS Act की धारा 36-A(4) के खुले उल्लंघन पर ध्यान दिया और कहा,
“इस मामले में NDPS Act की धारा 36-A(4) में दिए गए कानूनी प्रावधानों का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया। अदालत इस तथ्य को भी अनदेखा नहीं कर सकती कि नियमों के अनुसार, 180वें दिन मामले को संबंधित अदालत के समक्ष पेश ही नहीं किया गया। इससे पता चलता है कि संबंधित अदालत भी NDPS Act की धारा 36-A(4) में दिए गए कानूनी प्रावधानों को समझने में पूरी तरह विफल रही है।”
याचिकाकर्ता को 28.07.2025 को गिरफ्तार किया गया और हिरासत में भेज दिया गया। उस पर NDPS Act की धारा 21(c)/29 के तहत अपराध करने का आरोप था, जिसमें उसके पास 320 ग्राम 'ब्राउन शुगर' (नशीला पदार्थ) होने का आरोप लगाया गया।
हालांकि पुलिस ने 22.01.2026 (हिरासत का 179वां दिन) को चार्जशीट तैयार कर ली थी, लेकिन वे उसी दिन इसे विशेष अदालत के समक्ष पेश नहीं कर पाए। अंततः, अदालत ने इसे 24.01.2026 (हिरासत का 181वां दिन) को रिकॉर्ड पर लिया। याचिकाकर्ता की ओर से स्पेशल कोर्ट में 'डिफ़ॉल्ट बेल' (Default Bail) के लिए अर्ज़ी दी गई, लेकिन अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने इसका विरोध किया। उनका तर्क था कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद ऐसी अर्ज़ी स्वीकार नहीं की जा सकती। अंततः, स्पेशल कोर्ट ने डिफ़ॉल्ट बेल देने से इनकार किया।
याचिकाकर्ता के वकील देवाशीष पांडा ने ज़ोर देकर कहा कि अधिनियम की धारा 36-A(4) के प्रावधानों के अनुसार, 180 दिन पूरे होने पर याचिकाकर्ता को डिफ़ॉल्ट बेल पर रिहा किया जाना चाहिए था। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि अभियोजन पक्ष ने जांच पूरी करने के लिए उक्त प्रावधान के तहत स्पेशल कोर्ट से समय बढ़ाने (Extension) की कोई मांग नहीं की थी, जबकि इस दौरान देरी होती रही।
संबंधित इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IIC) ने कोर्ट में एक हलफनामा (Affidavit) दाखिल किया। इसमें उन्होंने स्वीकार किया कि भले ही चार्जशीट 22.01.2026 को तैयार हो गई, लेकिन कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण इसे 24.01.2026 तक कोर्ट के सामने पेश नहीं किया जा सका।
इस दलील को सुनने के बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि चार्जशीट वास्तव में शुरुआती रिमांड के 181वें दिन दाखिल की गई, जो जांच के लिए तय समय-सीमा से बाहर है। इसलिए अभियोजन पक्ष द्वारा धारा 36-A(4) का उल्लंघन किए जाने के कारण कोर्ट के पास याचिकाकर्ता को डिफ़ॉल्ट बेल पर रिहा करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था।
कोर्ट ने आगे कहा,
"इस कोर्ट के पास यह मानने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है कि अभियोजन पक्ष NDPS Act की धारा 36-A(4) में तय समय-सीमा का पालन करने में पूरी तरह विफल रहा है। इसलिए याचिकाकर्ता डिफ़ॉल्ट बेल पर रिहा होने का हकदार है।"
Case Title : Biswa Ranjan Routray v. State of Odisha

