S. 225 BNSS | मजिस्ट्रेट को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर रहने वाले आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले जांच का आदेश देना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

Shahadat

22 April 2026 7:52 PM IST

  • S. 225 BNSS | मजिस्ट्रेट को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर रहने वाले आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले जांच का आदेश देना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि मजिस्ट्रेट को अपने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रहने वाले आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 225 के तहत जांच करनी चाहिए या जांच का निर्देश देना चाहिए।

    दूसरे शब्दों में, यदि किसी व्यक्ति पर किसी आपराधिक शिकायत में आरोप लगाया गया और वह अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहता है तो अदालत ने कहा कि मैजिस्ट्रेट धारा 225 BNSS के आदेश का पालन किए बिना तुरंत समन जारी नहीं कर सकता।

    बेंच ने कहा,

    "...मजिस्ट्रेट के लिए यह अनिवार्य है कि वह धारा 225 का उपयोग करे, जब वह इस बात से संतुष्ट हो जाए कि आरोपी व्यक्ति उस क्षेत्र से बाहर किसी स्थान पर रह रहा है, जहां वह अपना अधिकार क्षेत्र रखता है।"

    जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें मैजिस्ट्रेट के उस निर्णय को सही ठहराया गया, जिसमें उसने धारा 225 के आदेश का पालन किए बिना आरोपी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।

    BNSS की धारा 225 यह प्रावधान करती है कि किसी अपराध की शिकायत मिलने पर, जिस पर मैजिस्ट्रेट संज्ञान लेने के लिए अधिकृत है, यदि आरोपी मजिस्ट्रेट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रहता है तो मजिस्ट्रेट को या तो स्वयं शिकायत की जांच करनी चाहिए या जांच का निर्देश देना चाहिए।

    इस मामले में अपीलकर्ता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष शुरू की गई कार्यवाही को दो मुख्य आधारों पर चुनौती दी: पहला, कि मजिस्ट्रेट के पास क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं था; और दूसरा, कि धारा 223 (शिकायत की जांच) के तहत शक्तियों का प्रयोग करने से पहले धारा 225 BNSS के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

    हालांकि, अधिकार क्षेत्र से संबंधित आपत्ति हाईकोर्ट के समक्ष उठाई गई, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने भी धारा 225 के अनुपालन पर जोर दिए बिना ही कार्यवाही को सही ठहरा दिया, जिसके परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट में यह अपील दायर की गई।

    अपील स्वीकार करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि हाईकोर्ट ने BNSS की धारा 225 के गैर-अनुपालन को नजरअंदाज करके गलती की, जबकि उसने अपीलकर्ता के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया (Process) जारी की थी, जो कि स्वीकार्य रूप से मैजिस्ट्रेट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रह रहा था।

    अदालत ने कहा,

    "...मुद्दा संख्या 2 पर हाई कोर्ट का निष्कर्ष रद्द किया जाता है, क्योंकि उक्त तर्क को स्वीकार करने से धारा 225 निष्प्रभावी और अनावश्यक हो जाएगी।"

    तदनुसार, अपील स्वीकार की गई। साथ ही मामला वापस हाईकोर्ट भेज दिया गया ताकि मजिस्ट्रेट के क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर निर्णय लिया जा सके।

    Cause Title: RAJEEV MEHTA @ RAJIV KISHOR KIRTILAL MEHTA VERSUS PARAM BIR SINGH

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