सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

Shahadat

21 Jun 2026 10:00 AM IST

  • सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

    सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (15 जून, 2026 से 19 जून, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

    बीमा कराने वाले मालिक द्वारा सौंपे गए वाहन की चोरी के लिए फाइनेंसर इंश्योरेंस का दावा नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीमा वाले वाहन को उसके मालिक द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति (जिसने वाहन खरीदने के लिए फाइनेंस किया था) को सौंप देना ही फाइनेंसर के लिए वाहन के नुकसान या चोरी होने पर मुआवज़े का दावा करने के लिए काफ़ी नहीं होगा।

    जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) के फ़ैसले में दखल देने से इनकार किया। कमीशन ने बीमा कंपनियों के पक्ष में फ़ैसला सुनाते हुए माना था कि अपीलकर्ता (वाहन फाइनेंसर) और प्रतिवादी (बीमा कंपनी) के बीच कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं था, जिससे चोरी के कारण वाहन के नुकसान के लिए बीमा कंपनी की ज़िम्मेदारी तय की जा सके।

    Cause Title: K. PRAKASHCHAND VERSUS ORIENTAL INSURANCE CO. LTD.

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    आर्बिट्रेशन क्लॉज़ होने से कंज्यूमर फोरम का अधिकार क्षेत्र खत्म नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी एग्रीमेंट में आर्बिट्रेशन क्लॉज़ (मध्यस्थता खंड) होने मात्र से कंज्यूमर फोरम को मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला करने से नहीं रोका जा सकता। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा, "...आर्बिट्रेशन क्लॉज़ अपने आप में कंज्यूमर फोरम के अधिकार क्षेत्र को खत्म नहीं करता है।"

    Cause Title: T.K.A. PADMANABHAN VERSUS ABHIYAN COOPERATIVE GROUP HOUSING SOCIETY LTD

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    फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार, इसके लिए कानून बनाने पर विचार करे केंद्र: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फुटपाथ पर चलना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) और 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है और यह अधिकार मोटर वाहनों के अधिकार से पहले आता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस अधिकार की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार करने को कहा है।

    जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक सड़क दुर्घटना मामले में की, जिसमें स्कूल जाते समय 5 वर्षीय बच्चे की टैंकर की चपेट में आने से मौत हो गई थी। कोर्ट ने बच्चे के परिवार को दिया गया मुआवजा बढ़ाकर 11.44 लाख रुपये कर दिया।

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    महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाएं अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार से जुड़ीं: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अदालत परिसरों में महिला अधिवक्ताओं के लिए स्वच्छ शौचालय, लेडीज़ बार रूम और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार से सीधे जुड़ी हुई है।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ महिला अधिवक्ताओं द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देशभर की अदालतों में लेडीज़ बार रूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया गया है।

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    पैदल चलने वालों का फुटपाथ पाने का मौलिक अधिकार; मोटर चलाने वाले पैदल चलने के अधिकार को नकार नहीं सकते: सुप्रीम कोर्ट

    एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि तय फुटपाथ पर चलने का अधिकार संविधान के आर्टिकल 19(1)(d) के तहत मौलिक अधिकार है, जिसमें सुरक्षित और सही ढंग से बने फुटपाथ तक पहुंचने का अधिकार भी शामिल है। मोटर वाले वाहनों की आवाजाही की तुलना में इस अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी। इसे मौलिक अधिकार इसलिए माना गया, क्योंकि पैदल चलने का अधिकार हमेशा से हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से "अटूट" रूप से जुड़ा रहा है।

    Case Details: MANIYAR ILIYAZ SHAIK RIYAZ Vs P. AYYAPPAN|C.A. No. 4665-4666/2025

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    सरकारी कर्मचारी की हत्या के आरोपी परिजन को मिलने वाली 'दया के आधार पर आर्थिक सहायता' पर रोक: सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया नियम

    सुप्रीम कोर्ट ने 'हरियाणा सिविल सेवा (दया के आधार पर आर्थिक सहायता या नियुक्ति) नियम, 2019' के नियम 23(1) की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। यह नियम मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार को मिलने वाली दया के आधार पर आर्थिक सहायता को तब रोक देता है, जब परिवार का कोई पात्र सदस्य कर्मचारी की हत्या या हत्या के लिए उकसाने का आरोपी हो। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान दया के आधार पर नियुक्ति के दावों पर लागू नहीं होता है।

    Case Title – Atul Chauhan v. State of Haryana & Ors.

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