ई-रिक्शा के रेगुलेशन और हाईवे पर उनके चलने पर रोक लगाने की मांग वाली PIL पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Shahadat

6 May 2026 9:37 AM IST

  • ई-रिक्शा के रेगुलेशन और हाईवे पर उनके चलने पर रोक लगाने की मांग वाली PIL पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया, जिसमें राज्य में ई-रिक्शा के बिना किसी रेगुलेशन के चलने को लेकर चिंता जताई गई।

    जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डिवीज़न बेंच ने याचिका स्वीकार करने पर शुरुआती दलीलें सुनने के बाद निर्देश दिया:

    "प्रतिवादियों को सात कामकाजी दिनों के भीतर प्रोसेस फीस जमा करने पर नोटिस जारी किया जाए, जिसका जवाब चार हफ़्तों के भीतर देना होगा। इस बीच प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपना जवाब दाखिल करें।"

    याचिका में कहा गया कि भारत में शुरुआत में ई-रिक्शा बिना किसी कानूनी मान्यता के चलते थे, जिससे उनकी सुरक्षा और वैधता को लेकर बड़े पैमाने पर चिंताएं पैदा हो गईं। 2015 में मोटर वाहन (संशोधन) अध्यादेश के ज़रिए 1988 के अधिनियम में धारा 2A जोड़ी गई, जिसमें ई-रिक्शा को आधिकारिक तौर पर 'इलेक्ट्रिक वाहन' के रूप में मान्यता दी गई, जिनका उद्देश्य 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' (अंतिम छोर तक पहुंच) प्रदान करना है।

    याचिका में कहा गया कि हालांकि इस संशोधन ने केंद्र सरकार को ई-रिक्शा के तकनीकी विवरणों (स्पेसिफिकेशन्स) के संबंध में नियम बनाने की अनुमति दी, लेकिन इसने मार्गों के रेगुलेशन, परमिट प्रणाली या तेज़ रफ़्तार वाली सड़कों पर प्रतिबंधों के लिए कोई दिशानिर्देश प्रदान नहीं किए।

    याचिका में 1994 के एमपी मोटर वाहन नियमों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि ये नियम ई-रिक्शा के लिए अनुमत मार्गों को निर्धारित करने में विफल रहे हैं, जिससे ई-रिक्शा को तेज़ रफ़्तार वाले हाईवे, फ्लाईओवर और बाईपास पर चलने की पूरी आज़ादी मिल गई।

    याचिका में एमपी आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 का भी ज़िक्र किया गया, जिसमें यह बताया गया कि ई-रिक्शा को सड़कों पर चलने से रोकने के लिए कोई नियामक ढांचा मौजूद नहीं है। याचिका में कहा गया कि इस तरह का अनियंत्रित संचालन यात्रियों, पैदल चलने वालों और अन्य वाहन चालकों के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। साथ ही यह लाइसेंस प्राप्त वाणिज्यिक परिवहन सेवाओं के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा भी पैदा करता है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान होता है।

    याचिका में यह भी कहा गया कि WP 638/2025 मामले में इस मुद्दे से संबंधित अदालत का आदेश पारित होने के बावजूद, अधिकारियों द्वारा नियम बनाने या प्रतिबंधों को लागू करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।

    इसलिए याचिका में केंद्र और राज्य के अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गई कि वे राष्ट्रीय और राज्य हाईवे पर ई-रिक्शा के संचालन को विनियमित करने के लिए समान दिशानिर्देश तैयार करें और उन्हें अधिसूचित करें। याचिका में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि ई-रिक्शा बनावट के लिहाज़ से कम गति वाले कमज़ोर वाहन हैं, जो तेज़ रफ़्तार वाले हाईवे पर स्वाभाविक रूप से असुरक्षित होते हैं। इनका बिना किसी नियम-कानून के चलना, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' का उल्लंघन करता है।

    याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई कि ई-रिक्शा का संचालन केवल नगर निगम की सीमा के भीतर, सर्विस रोड और पहले से तय किए गए फीडर मार्गों तक ही सीमित रहे।

    Case Title: Nisha Gurjar v Union of India, WP-12718-2026

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