सुलह प्रक्रिया के बिना विवाद का फैसला नहीं कर सकता स्थायी लोक अदालत: केरल हाईकोर्ट

  • सुलह प्रक्रिया के बिना विवाद का फैसला नहीं कर सकता स्थायी लोक अदालत: केरल हाईकोर्ट

    केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि Legal Services Authorities Act की धारा 22C के तहत स्थायी लोक अदालत (Permanent Lok Adalat) किसी विवाद के गुण-दोष पर फैसला देने से पहले अनिवार्य रूप से सुलह (conciliation) की प्रक्रिया अपनाने के लिए बाध्य है। अदालत ने कहा कि केवल लागत जमा करने में देरी को आधार बनाकर सुलह प्रक्रिया को छोड़ा नहीं जा सकता।

    जस्टिस पी.एम. मनोज ने कहा कि यदि कोई विवाद पहले से किसी सक्षम अदालत में लंबित है, तो स्थायी लोक अदालत उस पर निर्णय नहीं दे सकती। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Canara Bank v. G.S. Jayarama पर भरोसा करते हुए कहा कि धारा 22C(8) के तहत निर्णय तभी दिया जा सकता है जब पक्षकार समझौते के लिए तैयार न हों या अनुपस्थित पक्ष उचित समय तक जवाब न दे।

    मामला एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के बीच विवाद से जुड़ा था। एसोसिएशन ने स्थायी लोक अदालत में याचिका दायर की थी। कंपनी ने आपत्ति उठाई कि इसी विवाद को लेकर पहले से दीवानी अदालत में मुकदमा लंबित है, इसलिए लोक अदालत के पास मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है।

    रिकॉर्ड देखने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि विवाद “public utility service” की श्रेणी में नहीं आता और मामला पहले से मुनसिफ कोर्ट में लंबित था। ऐसे में स्थायी लोक अदालत द्वारा पारित अवॉर्ड अधिकार क्षेत्र से बाहर था।

    इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने स्थायी लोक अदालत के अवॉर्ड को रद्द कर दिया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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