झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग में अवैध खनन पर जताई सख्त चिंता, कहा- कार्रवाई से बचने के लिए 'संस्थागत तैयारी की कमी' बहाना नहीं

Praveen Mishra

9 May 2026 5:17 PM IST

  • झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग में अवैध खनन पर जताई सख्त चिंता, कहा- कार्रवाई से बचने के लिए संस्थागत तैयारी की कमी बहाना नहीं

    झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग के इचक क्षेत्र में अवैध पत्थर खनन और गैरकानूनी स्टोन क्रशर यूनिट्स के संचालन को स्थापित मानते हुए राज्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि प्रशासन अब “संस्थागत तैयारी की कमी” का हवाला देकर पर्यावरणीय नुकसान पर कार्रवाई से बच नहीं सकता।

    चीफ़ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ सिवाने नदी क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बिना पर्यावरणीय मंजूरी और आवश्यक लाइसेंस के चल रहे खनन और स्टोन क्रशर यूनिट्स से भारी प्रदूषण फैल रहा है, जिससे कृषि भूमि, नदी पारिस्थितिकी, फसलें और स्थानीय निवासी प्रभावित हो रहे हैं।

    हाईकोर्ट ने कहा कि स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त वातावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। अदालत ने पाया कि अधिकारियों ने वर्षों से अवैध खनन की समस्या स्वीकार की, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

    कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव नहीं है और कानून लागू करने वाली एजेंसियां केवल “कागजी आश्वासनों” तक सीमित रही हैं।

    इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को खनन और स्टोन क्रशर यूनिट्स की सभी अनुमतियों की समीक्षा करने, अनुपालन सत्यापन तक संचालन रोकने, CCTV और GPS निगरानी लागू करने तथा पर्यावरण कानूनों के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि हजारीबाग वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में कोई खनन गतिविधि नहीं होगी।

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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