झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू में कस्टडी में हुई कथित मौत की न्यायिक जांच का आदेश दिया, BNSS की धारा 196(2) के तहत जांच करने को कहा

Shahadat

25 Jun 2026 7:38 PM IST

  • झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू में कस्टडी में हुई कथित मौत की न्यायिक जांच का आदेश दिया, BNSS की धारा 196(2) के तहत जांच करने को कहा

    झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू जिले में व्यक्ति की कस्टडी में हुई मौत और उस दौरान उसे दी गई यातना के आरोपों की न्यायिक जांच का आदेश दिया। कोर्ट 'डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सुरक्षा उपायों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

    जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की डिवीजन बेंच ने कहा कि अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने से पहले यह तय करना ज़रूरी है कि क्या किसी सरकारी अधिकारी ने 'डी.के. बसु' मामले में तय कानून का उल्लंघन किया। इसके अनुसार, बेंच ने पलामू के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को निर्देश दिया कि वे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 196(2) के तहत जांच करने के लिए एक ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को नियुक्त करें। जांच पंद्रह दिनों के भीतर शुरू होनी चाहिए और रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सौंपी जानी चाहिए।

    यह याचिका महफूज अहमद के परिवार के सदस्यों ने दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने 1 मार्च, 2025 को अहमद को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया और कई दिनों तक कस्टडी में यातना दी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बाद में अहमद को घायल हालत में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उन्होंने रिमांड से पहले जारी किए गए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट से जुड़े हालात पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ताओं ने आगे आरोप लगाया कि इसके बाद अहमद की हालत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई।

    दूसरी ओर, राज्य सरकार ने कहा कि इस मामले में विभागीय कार्यवाही पहले ही शुरू कर दी गई। बताया गया कि नवाबाजार पुलिस स्टेशन के इंचार्ज ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया गया और जांच पूरी होने तक उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

    सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने 6 मार्च, 2025 के मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट से जुड़े मुद्दों की जांच की। बेंच ने सर्टिफिकेट के बारे में मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. विजय कुमार सिंह से सवाल किए। डॉक्टर ने बताया कि उनके सामने ओरिजिनल फिटनेस सर्टिफिकेट की केवल फोटोकॉपी पेश की गई। उन्होंने आगे कहा कि बाद में अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच करने के बाद उन्होंने उस डॉक्यूमेंट को प्रमाणित किया।

    कोर्ट ने गौर किया कि चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने आरोपी की मेडिकल फिटनेस के बारे में संतुष्ट होने के बाद रिमांड का आदेश दिया। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड के कुछ पहलुओं की और बारीकी से जांच करने की ज़रूरत है।

    कोर्ट ने कहा:

    "यह कोर्ट, 06.03.2025 के शुरुआती आदेश और उसके बाद जारी किए गए आदेश को देखने के बाद यह समझ नहीं पा रहा है कि विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने किस आधार पर और क्यों 'बाद में' (later on) का ज़िक्र करते हुए आदेश जारी किया, जबकि आरोपी (जो अब मृत है) के परिवार के सदस्य या जांच अधिकारी की ओर से ऐसी कोई अर्ज़ी नहीं दी गई।"

    बेंच ने आगे कहा:

    "अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने से पहले इस कोर्ट को इस ठोस नतीजे पर पहुंचना होगा कि क्या राज्य के किसी अधिकारी ने वास्तव में कोई ऐसी गलती की, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य' (supra) मामले में तय किए गए कानून का उल्लंघन हो।"

    कोर्ट ने पाया कि पक्षों के विरोधाभासी दावों से तथ्यों को लेकर विवाद पैदा हुआ। इसलिए कोर्ट ने माना कि न्यायिक जांच ज़रूरी है। 'मोहम्मद मुमताज़ अंसारी बनाम झारखंड राज्य' मामले में अपने हालिया फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि हिरासत में हिंसा कानून के शासन का अपमान है और इस मामले में निष्पक्ष जांच की ज़रूरत को दोहराया।

    अब जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

    Case Title: Saida Khatoon & Ors. v. Smt. Vandana Dadel & Ors.

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