NDPS Act के तहत 'भांग' को 'कैनाबिस (हेम्प)' की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया: झारखंड हाईकोर्ट

Shahadat

4 July 2026 4:51 PM IST

  • NDPS Act के तहत भांग को कैनाबिस (हेम्प) की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया: झारखंड हाईकोर्ट

    झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि भांग रखना NDPS Act, 1985 के तहत अपराध नहीं है, क्योंकि इसे एक्ट की धारा 2(iii) के तहत "कैनाबिस (हेम्प)" की कानूनी परिभाषा से बाहर रखा गया। NDPS Act के तहत अपील करने वाले व्यक्ति की सज़ा रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) ने रिपोर्ट दी कि ज़ब्त किया गया पदार्थ भांग था, न कि गांजा, तो सज़ा को बरकरार नहीं रखा जा सकता।

    जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल जज बेंच एक क्रिमिनल अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें NDPS Act की धारा 20(B), 22(B) और 11(B) के तहत अपील करने वाले व्यक्ति की सज़ा को चुनौती दी गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 17 अक्टूबर 2000 को पुलिस की एक पेट्रोलिंग पार्टी ने चाईबासा बस स्टैंड के पास अपील करने वाले व्यक्ति को रोका, क्योंकि पुलिस को देखकर वह भागने की कोशिश कर रहा था। गवाहों और एक राजपत्रित अधिकारी (गज़ेटेड ऑफिसर) की मौजूदगी में उसके पास मौजूद VIP ब्रीफ़केस की तलाशी लेने पर पुलिस ने दावा किया कि उन्हें 12 पॉलीथीन पैकेट मिले जिनमें लगभग 11 किलोग्राम गांजा था। इसके बाद अपील करने वाले व्यक्ति पर NDPS एक्ट के तहत मुकदमा चलाया गया।

    हाईकोर्ट के सामने अपील करने वाले व्यक्ति के वकील ने 29 नवंबर 2002 की FSL रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें यह निष्कर्ष निकाला गया कि ज़ब्त किया गया पदार्थ "भांग" uw, न कि गांजा। यह तर्क दिया गया कि हालांकि रिपोर्ट में यह बताया गया कि गांजा और भांग दोनों कैनाबिस हैं, लेकिन भांग को विशेष रूप से NDPS एक्ट की धारा 2(iii) के तहत "कैनाबिस (हेम्प)" की परिभाषा से बाहर रखा गया। इसलिए इसे रखना एक्ट के तहत दंडनीय अपराध नहीं है।

    राज्य ने अपील का विरोध करते हुए तर्क दिया कि चूंकि FSL रिपोर्ट में ही यह दर्ज किया गया कि गांजा और भांग दोनों कैनाबिस हैं, इसलिए ज़ब्त किया गया पदार्थ फिर भी NDPS Act के दायरे में आएगा। कानूनी प्रावधानों की जांच करते हुए हाईकोर्ट ने कर्नाटक, पंजाब एंड हरियाणा, बॉम्बे और राजस्थान हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। इन फैसलों में कहा गया कि भांग NDPS Act की धारा 2(iii) के तहत "कैनाबिस (हेम्प)" की परिभाषा में नहीं आती है। कोर्ट ने देखा कि जहां धारा 2(iii) में खास तौर पर चरस, गांजा और उनके मिश्रण शामिल हैं, वहीं कानूनी परिभाषा में भांग का कोई ज़िक्र नहीं है।

    बेंच ने यह भी कहा कि ऐसा कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि भांग चरस या गांजे से बनाई जाती है, और न तो NDPS Act और न ही राज्य सरकार द्वारा जारी किसी नियम या नोटिफिकेशन में भांग को प्रतिबंधित ड्रग माना गया।

    कोर्ट ने कहा:

    "ऊपर की चर्चा, कारणों और खास बातों को ध्यान में रखते हुए यह बिल्कुल साफ है कि 'गांजा' और 'चरस' कैनाबिस (हेम्प) की परिभाषा में शामिल हैं, जबकि NDPS Act के तहत 'भांग' को इससे बाहर रखा गया..."

    कोर्ट ने यह भी देखा कि यह मामला कैनाबिस के पौधों की खेती का नहीं था, बल्कि सिर्फ़ एक ऐसे पदार्थ को अपने पास रखने का था, जिसे शुरू में गांजा समझा गया, लेकिन बाद में वह भांग निकला। यह मानते हुए कि NDPS Act के तहत अपील करने वाले को दोषी ठहराना "पूरी तरह से गैर-कानूनी और कानून के हिसाब से सही नहीं था", हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि और सज़ा को रद्द कर दिया और अपील मंज़ूर कर ली।

    Case Title: Sunil Kumar Singh v. State of Jharkhand

    Next Story