दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मी नियमित कर्मचारियों के समान तैनाती का दावा नहीं कर सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

Praveen Mishra

13 Jun 2026 3:47 PM IST

  • दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मी नियमित कर्मचारियों के समान तैनाती का दावा नहीं कर सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

    जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा है कि दैनिक वेतनभोगी (Daily Wagers) या संविदा/समेकित वेतन (Consolidated Basis) पर नियुक्त कर्मचारी किसी सरकारी कंपनी के बंद होने के बाद अन्य सरकारी विभागों में तैनाती (Deployment) के लिए नियमित या स्थायी कर्मचारियों के समान अधिकार का दावा नहीं कर सकते।

    जस्टिस संजय धर की एकल पीठ ने यह फैसला जम्मू एंड कश्मीर सीमेंट लिमिटेड (JKCL) के एक कर्मचारी की याचिका पर सुनाया, जिसमें उसने नियमितीकरण, नियमित वेतनमान, अन्य सरकारी विभाग में तैनाती और बकाया वेतन के भुगतान की मांग की थी।

    याचिकाकर्ता के पिता जेकेसीएल में मशीनरी अटेंडेंट थे और 2014 में सेवानिवृत्त होने के बाद कैंसर से उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद याचिकाकर्ता को सहानुभूतिपूर्वक आधार पर समेकित वेतन पर अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया था। बाद में उसकी सेवाएं समय-समय पर बढ़ाई जाती रहीं।

    कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) का लाभ केवल उसी स्थिति में दिया जा सकता है जब कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हुई हो। चूंकि याचिकाकर्ता के पिता की मृत्यु सेवानिवृत्ति के बाद हुई थी, इसलिए उसे अनुकंपा नियुक्ति या उसके आधार पर नियमित नियुक्ति का कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता।

    जेकेसीएल के बंद होने के बाद सरकार ने 333 कर्मचारियों में से 303 नियमित कर्मचारियों को विभिन्न सरकारी विभागों में तैनात कर दिया था, लेकिन समेकित वेतन और दैनिक वेतन पर कार्यरत 29 कर्मचारियों को इसमें शामिल नहीं किया गया।

    हाईकोर्ट ने कहा कि संविदा या दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति उन्हें सेवा में बने रहने, नियमितीकरण या अन्य विभागों में तैनाती का अधिकार नहीं देती। अदालत ने अपने पूर्व फैसले गुलाम नबी भट बनाम जम्मू-कश्मीर राज्य का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के साथ समानता का दावा नहीं कर सकते।

    हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता की बकाया मजदूरी के दावे को स्वीकार करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि उसने जितनी अवधि तक वास्तव में काम किया है, उस अवधि का समस्त बकाया वेतन तीन महीने के भीतर अदा किया जाए। ऐसा न करने पर राशि पर याचिका दायर करने की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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