बालिगों को अपनी पसंद से शादी करने का अधिकार, सुरक्षा देना पुलिस की जिम्मेदारी: जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट
Praveen Mishra
6 Nov 2026 12:38 PM IST

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग हो चुका कोई भी व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार विवाह करने का अधिकार रखता है और यदि ऐसा कोई जोड़ा सुरक्षा के लिए पुलिस से संपर्क करता है, तो उसकी जान और स्वतंत्रता की रक्षा करना पुलिस विभाग का कर्तव्य है।
जस्टिस सिंधु शर्मा ने यह टिप्पणी एक विवाहित जोड़े की याचिका का निस्तारण करते हुए की। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि उन्होंने परिवार के एक सदस्य की इच्छा के विरुद्ध अपनी मर्जी से शादी की है और अब उन्हें अपनी जान का खतरा है।
हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि जोड़े की शिकायत पर विचार किया जाए और यदि वे सुरक्षा के लिए संपर्क करते हैं, तो उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनकी वैवाहिक जिंदगी में किसी को हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, बशर्ते जांच में यह पुष्टि हो जाए कि दोनों बालिग हैं और उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा एवं सहमति से विवाह किया है।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ता मदीहा फिरदौस और एक अन्य व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पुलिस सुरक्षा की मांग की थी।
उनका कहना था कि उन्होंने 22 सितंबर 2026 को मुस्लिम पर्सनल लॉ, रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार विवाह किया था। दोनों बालिग थे और उन्होंने अपनी मर्जी से शादी की थी, लेकिन परिवार के एक सदस्य के विरोध के कारण उन्हें परेशान किया जा रहा था और जान से मारने की धमकियां मिलने की आशंका थी।
याचिकाकर्ताओं की उम्र साबित करने के लिए उनके वकील ने आर्मी गुडविल पब्लिक स्कूल, राजौरी द्वारा जारी दस्तावेज हाईकोर्ट के समक्ष पेश किया। इसके अलावा निकाहनामा भी रिकॉर्ड पर रखा गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एडवोकेट मोहम्मद आरिफ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Lata Singh v. State of U.P. (2006) का हवाला देते हुए दलील दी कि किसी कानूनी बाधा के अभाव में बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार है और पुलिस प्रशासन उनकी जान एवं स्वतंत्रता की सुरक्षा करने के लिए बाध्य है।
दोनों याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से भी कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए और उनके वकील ने उनकी पहचान की।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों याचिकाकर्ता बालिग हैं और उन्होंने 22 सितंबर 2026 को अपनी इच्छा से विवाह किया था।
कोर्ट ने कहा:
“बालिग होने की आयु प्राप्त कर चुका प्रत्येक व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार विवाह करने का अधिकार रखता है और यदि वह पुलिस विभाग से संपर्क करता है, तो उसकी जान और स्वतंत्रता की रक्षा करना पुलिस विभाग का कर्तव्य है।”
हालांकि, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ताओं ने याचिका दाखिल करने से पहले संबंधित पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा या हस्तक्षेप के लिए संपर्क नहीं किया था।
इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता पुलिस अधिकारियों के पास सुरक्षा की मांग लेकर जाते हैं, तो उनकी शिकायत पर विचार किया जाए और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
शादी की वैधता पर कोई राय नहीं दी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उसने याचिकाकर्ताओं के विवाह की वैधता के संबंध में कोई राय व्यक्त नहीं की है। पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध सामग्री और जांच के आधार पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में यह स्थापित होता है कि दोनों पक्ष बालिग हैं और उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा एवं सहमति से विवाह किया है, तो उन्हें आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
इन टिप्पणियों के साथ जस्टिस सिंधु शर्मा ने याचिका और संबंधित आवेदन का निस्तारण कर दिया। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि जोड़े द्वारा सुरक्षा की मांग किए जाने पर आदेश में की गई टिप्पणियों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।

