पत्नी जहां रहती है, वहां क्रूरता के आरोपों के आधार पर तलाक के मुकदमे के लिए अधिकार क्षेत्र तय हो सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

  • पत्नी जहां रहती है, वहां क्रूरता के आरोपों के आधार पर तलाक के मुकदमे के लिए अधिकार क्षेत्र तय हो सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

    जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी की तलाक की अर्ज़ी में उस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के अंदर क्रूरता की घटनाओं का आरोप लगाया गया तो सिर्फ़ इसलिए अर्ज़ी वापस नहीं की जा सकती कि शादी कहीं और हुई थी या अन्य घटनाएँ कहीं और घटी थीं।

    कोर्ट ने कहा कि शुरुआती चरण में सवाल यह है कि क्या अर्ज़ी में कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के अंदर 'कॉज़ ऑफ़ एक्शन' (मुकदमे का आधार) का कोई हिस्सा बताया गया, न कि यह कि आरोप अंततः साबित हो सकते हैं या नहीं।

    कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर VII नियम 10 के तहत आवेदन खारिज करने को चुनौती दी गई। इस आवेदन के ज़रिए पति ने जम्मू की फैमिली कोर्ट में दायर तलाक की अर्ज़ी को वापस करने की मांग की थी, क्योंकि शादी और मुख्य घटनाएँ राजौरी ज़िले के थानामंडी में हुई थीं।

    जस्टिस संजय धर ने याचिका खारिज करते हुए ज़ोर दिया,

    "CPC के ऑर्डर VII नियम 10 के तहत आवेदन पर निर्णय लेते समय कोर्ट अर्ज़ी में किए गए दावों की सच्चाई या सटीकता की जाँच नहीं कर सकता।"

    पत्नी ने अपनी शादी खत्म करने के लिए जम्मू की फैमिली कोर्ट में 'मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939' की धारा 2 के तहत कार्यवाही शुरू की थी।

    पति ने CPC के ऑर्डर VII नियम 10 के तहत अर्ज़ी वापस करने की मांग करते हुए तर्क दिया कि शादी राजौरी ज़िले की थानामंडी तहसील के राजधानी में हुई और मुख्य घटनाएँ, जिनमें कथित क्रूरता और परित्याग (छोड़ देना) शामिल हैं, वहीं हुई थीं। इसलिए उसने जम्मू की फैमिली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया।

    फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए आवेदन खारिज किया कि 'कॉज़ ऑफ़ एक्शन' का कुछ हिस्सा उसके अधिकार क्षेत्र के अंदर हुआ था। पति ने उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

    Case Title: Israr Manzoor v. Takdis Alyas @ Takids Alyas

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