छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज की मांग के कारण गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को ज़मानत देने से इनकार किया

Shahadat

5 Aug 2026 8:37 PM IST

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज की मांग के कारण गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को ज़मानत देने से इनकार किया

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उस पति को रेगुलर ज़मानत देने से इनकार किया, जिस पर दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और अंततः उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि ज़मानत अर्ज़ी पर विचार करते समय FIR दर्ज करने में देरी और गवाहों के बयानों में कथित विसंगतियों जैसे मुद्दे ट्रायल के दौरान देखे जाने वाले मामले हैं और उन पर अभी पक्के तौर पर विचार नहीं किया जा सकता।

    चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 483 के तहत दायर पहली ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई कर रहे थे। यह अर्ज़ी उस व्यक्ति ने दायर की थी जिसे भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 80(2) के तहत सज़ा-योग्य अपराध के लिए गिरफ़्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और मृतका की शादी घटना से लगभग तीन साल पहले हुई थी और उनसे एक बेटी भी हुई थी।

    आरोप है कि आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों ने मृतका को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। यह भी आरोप लगाया गया कि घटना से एक रात पहले आरोपी ने दहेज की मांग को लेकर मृतका से फिर झगड़ा किया और उसके साथ मारपीट की, जिसके बाद उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

    आरोपी का तर्क था कि घटना के लगभग चार महीने बाद FIR दर्ज की गई, 'मर्ग' जांच (अस्वाभाविक मौत की जांच) के दौरान दर्ज बयानों में दहेज की मांग का कोई आरोप नहीं लगाया गया, कोई सुसाइड नोट या मरने से पहले दिया गया बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) नहीं मिला और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई। राज्य ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि मृतका ने लगातार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की थी। यह भी बताया गया कि मौत के समय मृतका लगभग 18 से 20 सप्ताह की गर्भवती थी।

    दोनों पक्षों की दलीलों और केस डायरी पर विचार करने के बाद कोर्ट ने पाया कि जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूत, खासकर मृतका के परिवार के सदस्यों और स्वतंत्र गवाहों के बयान, प्रथम दृष्टया यह संकेत देते हैं कि दहेज के रूप में मोटरसाइकिल की मांग को लेकर मृतका को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि पक्षों के बीच पहले सुलह की कोशिशें हुईं, लेकिन कथित उत्पीड़न जारी रहा। कोर्ट ने इस बात को अहम माना कि मरने वाली महिला लगभग 18 से 20 हफ़्ते की गर्भवती थी और उसने शादी के कुछ ही सालों के भीतर आत्महत्या कर ली थी।

    कोर्ट ने कहा:

    “हालांकि अर्ज़ी देने वाले के वकील ने FIR दर्ज करने में हुई देरी और 'मर्ग' (मौत की सूचना) बयानों में दहेज की मांग के आरोपों का ज़िक्र नहीं होने की बात कही है, लेकिन ये सभी बातें ट्रायल के दौरान जांचने-परखने वाली हैं और ज़मानत पर विचार करने के चरण में इन पर पक्के तौर पर कोई राय नहीं बनाई जा सकती।”

    आरोपों की गंभीरता, अपराध की प्रकृति, जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि एक गर्भवती महिला की मौत कथित तौर पर लगातार वैवाहिक क्रूरता के कारण हुई, कोर्ट ने माना कि अर्ज़ी देने वाला नियमित ज़मानत का हकदार नहीं है, इसलिए ज़मानत की अर्ज़ी खारिज की।

    Case Title: Murlidhar Bagh v. State of Chhattisgarh [MCRC No. 6797 of 2026]

    अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story