Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने अगरतला में राजनीतिक सभा को प्रतिबंधित करने के आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया

LiveLaw News Network
29 Sep 2021 4:38 AM GMT
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने अगरतला में राजनीतिक सभा को प्रतिबंधित करने के आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया
x

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार को एक जनहित याचिका (PIL) याचिका पर नोटिस जारी किया।

उक्त याचिका में जिला मजिस्ट्रेट, पश्चिम त्रिपुरा के आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश में अगरतला में चार नवंबर तक किसी भी राजनीतिक दल द्वारा कई हिस्सों में किसी भी तरह की बैठक/जुलूस/सार्वजनिक सभा पर रोक लगाई गई है।

मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति एस जी चट्टोपाध्याय की पीठ ने याचिका में शामिल मुद्दों की जांच के लिए एक नोटिस जारी किया। हालांकि इसे पांच अक्टूबर 2021 के लिए वापस किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण रूप से याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि आक्षेपित आदेश बिना विवेक के उचित इस्तेमाल के पारित किया गया है। साथ ही प्राधिकरण के पास इस तथ्य के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं है कि क्षेत्र में स्थिति इतनी बुरी है कि इस तरह के एक व्यापक निषेध को लागू करना आवश्यक है, जिससे क्षेत्र में सभी राजनीतिक गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया।

उन्होंने प्रस्तुत किया कि प्राधिकरण ने कम से कम आक्रामक प्रतिबंध के विकल्प पर विचार नहीं किया था और सीआरपीसी की धारा 144 के तहत शक्तियों के प्रयोग में आक्षेपित आदेश पारित किया गया।

दूसरी ओर, महाधिवक्ता ने याचिका की सुनवाई के आधार पर इसका विरोध किया।

संबंधित समाचार में, त्रिपुरा हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था। इसमें राज्य सरकार के आदेश के बावजूद सदर क्षेत्र में किसी भी राजनीतिक दल द्वारा दिवाली तक सभी बैठकों, जुलूस, सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाने के बावजूद एक विरोध रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि सरकार ने कथित निषेधाज्ञा दिनांक 20.09.2021 को जारी करने में द्वेष के साथ काम किया और इसका उद्देश्य केवल अगरतला शहर में किसी भी रैली को आयोजित करने से रोकना है (22 सितंबर को निर्धारित एक रैली को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा संबोधित किया जाना था)।

न्यायमूर्ति अरिंदम लोध की खंडपीठ ने सरकार के आदेश का अवलोकन किया और कहा कि सरकार ने राज्य के सबसे बड़े त्योहार दुर्गापूजा की पूर्व संध्या पर विभिन्न पहलुओं पर विचार किया और उन्होंने यह भी बताया कि निषेधाज्ञा क्यों जारी की गई।

कोर्ट ने कहा,

"मेरी राय में यह सरकार का नीतिगत निर्णय है। इस संबंध में इस न्यायालय की शक्ति बहुत सीमित है। नीतिगत निर्णय लेना पूरी तरह से कार्यपालकों के अधिकार क्षेत्र में है। न्यायालय विधायिकाओं पर निहित शक्ति पर आक्रमण नहीं कर सकता, जब तक कि मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता।"

ऑर्डर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें




Next Story