क्लाइंट के पास से ड्रग्स हुए थे बरामद, हाईकोर्ट ने Rapido कैब ड्राइवर को ज़मानत दी

Shahadat

8 May 2026 8:40 PM IST

  • क्लाइंट के पास से ड्रग्स हुए थे बरामद, हाईकोर्ट ने Rapido कैब ड्राइवर को ज़मानत दी

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक कैब ड्राइवर को नियमित ज़मानत दी है। इस ड्राइवर पर Tramadol की कमर्शियल मात्रा बरामद होने से जुड़े एक मामले में आरोप है। कोर्ट ने यह देखते हुए ज़मानत दी कि पहली नज़र में यह प्रतिबंधित सामान उस यात्री के पास से बरामद हुआ था, जिसने Rapido ऐप के ज़रिए राइड बुक की थी। यह सवाल कि क्या ड्राइवर को इस सामान के बारे में पता था (conscious possession), इसका फ़ैसला ट्रायल के दौरान किया जाएगा।

    जस्टिस सुभाष मेहता ने कहा,

    "याचिकाकर्ता कैब ड्राइवर है और वह एक ऐसी कैब चला रहा था, जिसे सह-आरोपी ने 'Rapido' ऐप के ज़रिए बुक किया था। उक्त सह-आरोपी/ग्राहक को प्रतिबंधित सामान (यानी पिछली सीट से) के साथ पकड़ा गया था।"

    अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, एक कार की पिछली सीट से Tramadol की 15,000 गोलियों वाले दो बैग बरामद किए गए। इस कार में याचिकाकर्ता (कैब ड्राइवर) अपने सह-आरोपियों के साथ यात्रा कर रहा था। बताया गया कि बरामद की गई मात्रा कमर्शियल मात्रा थी।

    याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित सामान उन यात्रियों के पास से बरामद हुआ था, जिन्होंने ऐप-आधारित सेवा के ज़रिए उसकी कैब बुक की थी। आगे यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता के पास से कोई बरामदगी नहीं हुई थी, उसका पिछला रिकॉर्ड साफ़-सुथरा था, और वह पाँच महीने से ज़्यादा समय से हिरासत में था।

    राज्य सरकार ने ज़मानत की अर्ज़ी का विरोध करते हुए ज़ोर दिया कि बरामद की गई मात्रा कमर्शियल मात्रा थी और याचिकाकर्ता को सह-आरोपियों के साथ ही पकड़ा गया था। हालांकि, कोर्ट के एक खास सवाल पर राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि जाँच के दौरान यह पाया गया कि राइड बुक करने से पहले याचिकाकर्ता का सह-आरोपियों से कोई पहले का संपर्क नहीं था।

    इस बात पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल एक ऐसी कैब चला रहा था, जिसे सह-आरोपियों ने बुक किया था। कथित प्रतिबंधित सामान पिछली सीट से बरामद हुआ था, जहां वे बैठे थे। कोर्ट ने आगे कहा कि इस चरण पर प्रतिबंधित सामान का मालिकाना हक और जानकारी यात्री की ही लगती है। इस मामले का फ़ैसला ट्रायल के दौरान किया जाएगा।

    कोर्ट ने कहा,

    "राज्य के जवाब के अनुसार, याचिकाकर्ता कैब बुक करने से पहले सह-आरोपी के संपर्क में नहीं था। इसलिए इस चरण पर मौजूदा याचिका के निपटारे के लिए, प्रथम दृष्टया, सामान (अवैध वस्तु) कैब के ग्राहक (यानी सह-आरोपी) का प्रतीत होता है, और यह एक ऐसा प्रश्न है, जिसका निर्णय ट्रायल के दौरान किया जाएगा।"

    कोर्ट ने याचिकाकर्ता की पाँच महीने से अधिक की हिरासत अवधि, उसके साफ-सुथरे आपराधिक रिकॉर्ड और ट्रायल पूरा होने में देरी की संभावना पर भी विचार किया। इस स्थापित सिद्धांत को दोहराते हुए कि "जमानत नियम है और जेल अपवाद," कोर्ट ने फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ता को और अधिक समय तक हिरासत में रखने से कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

    तदनुसार, कोर्ट ने याचिका स्वीकार की और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार आवश्यक बॉन्ड जमा करने पर नियमित जमानत पर रिहा कर दिया जाए।

    Title: Ram Kumar Pandey v. State of Punjab

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