सुप्रीम कोर्ट की तीन दिन की स्पेशल लोक अदालत ने 'समाधान समारोह 2026' के तहत 1,712 मामलों का निपटारा किया
Shahadat
25 Aug 2026 9:15 AM IST

24 अगस्त को जारी सुप्रीम कोर्ट के बयान के अनुसार, 'समाधान समारोह 2026' के तहत आयोजित तीन दिन की स्पेशल लोक अदालत में कुल 1,712 मामलों का निपटारा किया गया, जिनमें मध्यस्थता (Mediation) के ज़रिए सुलझाए गए 48 मामले भी शामिल हैं।
यह स्पेशल लोक अदालत 21 से 23 अगस्त तक 'समाधान' पहल के समापन के तौर पर आयोजित की गई। यह पहल 21 अप्रैल, 2026 को एक व्यवस्थित प्री-सेटलमेंट प्रक्रिया के साथ शुरू हुई थी, जिसका मकसद ऐसे लंबित मामलों की पहचान करना था, जिन्हें आपसी सहमति से सुलझाया जा सके। समझौते की संभावना तलाशने के लिए वादियों और उनके वकीलों को पहले ही शामिल किया गया।
तीन दिन की स्पेशल लोक अदालत के दौरान कुल 3,285 मामले सूचीबद्ध (list) किए गए। इनमें से 1,664 मामलों का निपटारा लोक अदालत प्रक्रिया के ज़रिए किया गया। इसके अलावा, 48 मामलों को मध्यस्थता के ज़रिए सुलझाया गया, जिससे निपटाए गए मामलों की कुल संख्या 1,712 हो गई।
21 अगस्त को 588 मामले सूचीबद्ध किए गए और 402 का निपटारा किया गया। 22 अगस्त को 1,159 मामले सूचीबद्ध किए गए और 350 का निपटारा किया गया। 23 अगस्त को 1,538 मामले सूचीबद्ध किए गए और 912 का निपटारा किया गया।
इस तीन दिन की अवधि के दौरान कुल 2,40,94,37,087.38 रुपये (240.9 करोड़ रुपये) की राशि का भुगतान किया गया।
बयान में कहा गया कि 21 से 23 अगस्त तक चली स्पेशल लोक अदालत में सूचीबद्ध होने का इंतज़ार किए बिना, 21 अप्रैल से 20 अगस्त के बीच भी कई मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
'सुप्रीम कोर्ट एक्शन फॉर मीडिएटेड एडजुडिकेशन एंड डिस्प्यूट्स हार्मोनाइज़ेशन अक्रॉस नेशन' (SAMADHAN) नाम की यह पहल, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के मार्गदर्शन में शुरू की गई, ताकि विवादों के मध्यस्थता-आधारित, आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा दिया जा सके।
बयान में कहा गया,
"यह नतीजा भारत के माननीय चीफ जस्टिस द्वारा न्याय देने की व्यवस्था के एक असरदार हिस्से के तौर पर आपसी सहमति से विवाद सुलझाने पर दिए गए ज़ोर को दिखाता है। इस प्रक्रिया को सिर्फ़ तीन दिन की लोक अदालत की बैठकों तक सीमित रखने के बजाय, 'समाधान समारोह' ने एक व्यापक संस्थागत प्रक्रिया बनाई, जिसमें मामलों की पहचान की गई, पक्षों को शामिल किया गया और पहले से ही समझौते की संभावनाओं पर विचार किया गया।"
लोक अदालत की बेंचों की अध्यक्षता CJI और अन्य सीनियर जज ने की। जज, सीनियर वकील और 'एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड' लोक अदालत की बेंचों के सदस्य थे और सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के सीनियर रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों ने उनकी मदद की। उन्होंने पक्षों को अपनी मर्ज़ी से समझौते पर पहुँचने के लिए मनाने की कोशिश की।
विशेष लोक अदालत ने उन मामलों पर काम किया जिनमें समझौता हो सकता था, जैसे कि वैवाहिक और संपत्ति विवाद, मोटर दुर्घटना के दावे, ज़मीन अधिग्रहण और मुआवज़े के मामले, टैक्स से जुड़े मामले, और सुप्रीम कोर्ट में लंबित सेवा और श्रम विवाद।
सुप्रीम कोर्ट के बयान में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि 'समाधान' प्रक्रिया सिर्फ़ तीन दिन की लोक अदालत की बैठकों तक सीमित नहीं थी। इसमें मामलों के सूचीबद्ध होने से पहले ही उनकी पहचान करना, पक्षों को शामिल करना और समझौते की संभावनाओं पर विचार करना शामिल था।
इसमें कहा गया कि इस प्रक्रिया से पक्ष आपसी सहमति और बातचीत के ज़रिए विवाद सुलझा सके, लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों में लगने वाले समय और खर्च को कम कर सके, मुक़दमेबाज़ों को ज़्यादा निश्चितता और अंतिम समाधान मिल सके, और लंबित मामलों की संख्या कम करने में मदद मिल सके। बयान में यह भी कहा गया कि इससे उन मामलों के लिए न्यायिक समय बचाने में भी मदद मिली जिनमें न्यायिक फ़ैसले की ज़रूरत थी।
'समाधान समारोह 2026' का समापन 23 अगस्त को हुआ।

