'सरकार को हिरासत में लिए गए व्यक्ति की अर्जी पर जल्द-से-जल्द विचार करना चाहिए': सुप्रीम कोर्ट ने NSA के तहत हिरासत आदेश रद्द किया

Shahadat

4 May 2026 9:49 AM IST

  • सरकार को हिरासत में लिए गए व्यक्ति की अर्जी पर जल्द-से-जल्द विचार करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने NSA के तहत हिरासत आदेश रद्द किया

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी निवारक हिरासत आदेश को इस आधार पर रद्द किया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की निवारक हिरासत के खिलाफ अर्जी पर राज्य सरकार ने देर से विचार किया।

    जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए पाया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति (अपीलकर्ता) ने अपने खिलाफ जारी हिरासत आदेश के खिलाफ दो अर्जियां दी थीं - एक, हिरासत जारी करने वाले अधिकारी को, और दूसरी, राज्य सरकार को। हालांकि, राज्य सरकार ने उसकी अर्जी पर तब विचार किया, जब वह हिरासत आदेश को पहले ही मंजूरी दे चुकी है।

    चूंकि राज्य सरकार ने हिरासत में लिए गए व्यक्ति की अर्जी पर हिरासत आदेश को मंजूरी देने के बाद ही विचार किया, इसलिए कोर्ट ने निवारक हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की अर्जी पर जल्द से जल्द विचार किया जाना चाहिए।

    आगे कहा गया,

    "संबंधित सरकार का यह कर्तव्य है कि वह हिरासत में लिए गए व्यक्ति की अर्जी पर जल्द-से-जल्द विचार करे। मौजूदा मामले में हिरासत जारी करने वाले अधिकारी ने अर्जी को तुरंत राज्य सरकार को नहीं भेजा, जबकि जेल अधिकारियों ने उसे हिरासत जारी करने वाले अधिकारी को काफी पहले ही भेज दिया था।"

    कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की अर्जी पर देर से विचार करने के कारण हिरासत आदेश और उसे दी गई मंजूरी, दोनों ही दोषपूर्ण हो गए। तदनुसार, निवारक हिरासत आदेश और उसकी मंजूरी, दोनों को रद्द किया और अपीलकर्ता को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया।

    संक्षेप में मामला

    हिरासत के कारणों में लगाए गए आरोपों के अनुसार, हिरासत में लिए गए व्यक्ति और उसके जान-पहचान वालों ने मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि और द्वारकाधीश मंदिर के पास अनाधिकृत रूप से खुदाई और निर्माण कार्य किया।

    स्थानीय निवासियों की आपत्तियों के बावजूद, खुदाई का काम जारी रहा, जिसके परिणामस्वरूप पांच मकान ढह गए और आधा दर्जन अन्य मकानों में दरारें आ गईं। इसके अलावा, बच्चों सहित तीन लोगों की मौत भी हो गई।

    इस घटना से चारों ओर अफरा-तफरी मच गई, जिसके कारण यातायात जाम हो गया और NDRF तथा SDRF जैसी विशेष सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ा। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को BNS की धारा 105 के तहत मामला दर्ज करने के बाद गिरफ्तार किया गया। उसने 30 जून, 2025 को जमानत के लिए अर्जी दी। इसके दो दिन बाद मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट ने विवादित हिरासत आदेश (2 जुलाई) जारी किया।

    हाईकोर्ट के सामने हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने यह दलील दी कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी के लिए NSA लगाने का कोई मौका ही नहीं था, क्योंकि वह पहले से ही जेल में था। हालांकि, बेंच ने इस दलील को एक्ट की धारा 3 का हवाला देते हुए खारिज किया।

    कोर्ट ने साफ तौर पर यह फैसला दिया कि जहां हिरासत में लेने वाले अधिकारी की यह राय हो कि कोई व्यक्ति, जो जेल में है, उसके रिहा होने की संभावना है और रिहा होने पर इस बात का उचित अंदेशा है कि वह व्यक्ति सार्वजनिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह कामों में शामिल हो सकता है तो हिरासत में लेने वाला अधिकारी एक्ट की धारा 3 के तहत हिरासत का आदेश जारी कर सकता है।

    Case Title: SUNIL KUMAR GUPTA ALIAS SUNIL CHAIN v. UNION OF INDIA, Diary No. - 10476/2026

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