“हमारा संविधान 'रूल ऑफ लॉ' की परिकल्पना करता है, न कि 'रूल बाय लॉ' की” —HNLU में 5वें डॉ. बी. आर. आंबेडकर स्मृति व्याख्यान में जस्टिस रवीन्द्र भट्ट का अवलोकन
हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर ने 26 जनवरी 2026 को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर 5वाँ डॉ. बी. आर. आंबेडकर स्मृति व्याख्यान आयोजित किया। इस वर्ष व्याख्यान का विषय था — “एक लोकतांत्रिक गणराज्य के साथ हमारा संकल्प (Our Tryst with a Democratic Republic)”।
स्मृति व्याख्यान न्यायमूर्ति श्री रवीन्द्र भट्ट, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय की छात्र मानसिक स्वास्थ्य राष्ट्रीय कार्यबल के प्रमुख तथा एचएनएलयू की जनरल काउंसिल के सदस्य, द्वारा प्रस्तुत किया गया।
अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. वी. सी. विवेकानंदन, कुलपति, एचएनएलयू ने कहा कि भारतीय संविधान स्वदेशी मूल्यों और वैश्विक संवैधानिक चिंतन का जीवंत समन्वय है, जो स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, सामाजिक न्याय और विविधता जैसे मूल आदर्शों पर आधारित है। उन्होंने रेखांकित किया कि गणराज्य केवल एक दस्तावेज़ से नहीं, बल्कि नागरिकों के दैनिक संवैधानिक आचरण, विश्वास और प्रतिबद्धता से जीवित रहता है।
स्मृति व्याख्यान के मुख्य बिंदु
स्मृति व्याख्यान में न्यायमूर्ति रवीन्द्र भट्ट ने भारत की संवैधानिक यात्रा को स्वतंत्रता संग्राम से लेकर सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, सामाजिक न्याय और संविधान की सर्वोच्चता पर आधारित लिखित संविधान के अंगीकरण तक विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने जानबूझकर 'रूल ऑफ लॉ' को अपनाया, जहाँ संविधान सर्वोच्च है—और इसे 'रूल बाय लॉ' से अलग समझना आवश्यक है, जहाँ शक्ति का वर्चस्व होता है।
संविधान की समझ की कुंजी के रूप में प्रस्तावना पर बल देते हुए न्यायमूर्ति भट्ट ने बंधुत्व को वह सूत्र बताया जो स्वतंत्रता और समानता को वास्तविक अर्थ देता है। उन्होंने कहा कि बंधुत्व के बिना समानता खोखली हो जाती है।
न्यायमूर्ति भट्ट ने संविधान को एक जीवंत और विकसित होता साधन बताया, जो अपार त्याग और सामूहिक संघर्ष से जन्मा है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वराज्य केवल औपनिवेशिक शासन से मुक्ति का लक्ष्य नहीं था, बल्कि आंतरिक असमानताओं के समाधान की भी आकांक्षा थी।
समकालीन चुनौतियाँ और छात्रों के लिए संदेश
समकालीन चुनौतियों—विशेषकर तकनीकी परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता—पर विचार रखते हुए न्यायमूर्ति भट्ट ने तकनीक पर अंधाधुंध निर्भरता से सावधान किया और नैतिक विवेक, संवैधानिक मूल्यों तथा स्वतंत्र चिंतन के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने उन्हें सजग, सिद्धांतनिष्ठ और साहसी बने रहने का आह्वान किया, यह स्मरण कराते हुए कि गणराज्य का भविष्य उनके हाथों में है।
अन्य प्रमुख गतिविधियाँ
कार्यक्रम में डॉ. दीपक श्रीवास्तव, कुलसचिव (प्रभारी), एचएनएलयू का स्वागत भाषण तथा डॉ. अविनाश सामल, डीन (सामाजिक विज्ञान) का धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर कानून एवं स्वदेशी अध्ययन केंद्र (प्रमुख: डॉ. अयान हाज़रा) द्वारा प्रकाशित उद्घाटन न्यूज़लेटर 'कोइतुर – पीपल ऑफ़ नेचर' का भी विमोचन किया गया।
एचएनएलयू में डॉ. बी. आर. आंबेडकर स्मृति व्याख्यान श्रृंखला संवैधानिक चिंतन का एक महत्वपूर्ण मंच बनी हुई है। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न विधि संस्थानों के छात्रों एवं संकाय सदस्यों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।