ढाई साल की बच्ची से दुष्कर्म मामले में दोषी को 30 साल की कैद

Update: 2026-06-24 09:31 GMT

ओडिशा की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने ढाई साल की मासूम बच्ची के साथ जघन्य दुष्कर्म (Aggravated Penetrative Sexual Assault) के मामले में एक 24 वर्षीय युवक को दोषी करार देते हुए 30 साल की सश्रम कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है।

भुवनेश्वर के फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO) के तदर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Ad-hoc Additional Sessions Judge) सरोज कुमार साहू ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए आरोपी को कड़ी सजा से दंडित किया।

अमरूद देने के बहाने ले गया था आरोपी

अभियोजन पक्ष (Prosecution) के अनुसार, यह घटना 30 जून 2024 की दोपहर की है। बच्ची अपने नाना की गोद में रो रही थी, तभी पड़ोस में रहने वाला आरोपी वहां आया। उसने बच्ची को पुचकारा और अमरूद देने के बहाने उसे अपने घर ले गया। जब 15-20 मिनट तक बच्ची वापस नहीं लौटी, तो परिजनों को चिंता हुई।

बच्ची की मां जब आरोपी के घर पहुंची, तो कमरा अंदर से बंद था। शक होने पर जब आरोपी की मकई चचेरी बहन की मदद से दरवाजा धक्का देकर खोला गया, तो अंदर का नजारा खौफनाक था। आरोपी जमीन पर खून से सने तौलिए में लेटा हुआ था, जबकि मासूम बच्ची बिस्तर (पलंग) पर बेहोश पड़ी थी। बच्ची का पूरा शरीर खून से लथपथ था और उसके निजी अंग से खून बह रहा था।

चिकित्सीय और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने पुख्ता किया मामला

अदालत ने अपने फैसले में गवाहों और डॉक्टरों की रिपोर्ट को बेहद अहम माना।

पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट: बच्ची की जांच करने वाली महिला डॉक्टर ने अदालत में स्पष्ट किया कि बच्ची के निजी अंग और गाल पर ताजे जख्म और ब्लीडिंग थी, जो गंभीर और जबरन शारीरिक शोषण की पुष्टि करते हैं।

आरोपी की मेडिकल रिपोर्ट: आरोपी की जांच करने वाले डॉक्टर ने गवाही दी कि आरोपी शारीरिक रूप से कृत्य करने में सक्षम था और उसके जननांगों की स्थिति भी जबरन किए गए कृत्य के अनुकूल पाई गई।

वैज्ञानिक टीम की रिपोर्ट: घटना के अगले दिन साइंटिफिक टीम और जांच अधिकारी (IO) द्वारा तैयार की गई स्पॉट विजिट रिपोर्ट ने भी घटनास्थल पर जबरन शारीरिक संबंध बनाए जाने की बात को साबित किया।

कपड़ों पर खून न मिलने की दलील अदालत ने खारिज की

बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि आरोपी की गिरफ्तारी के वक्त पुलिस को उसके कपड़ों पर खून के निशान नहीं मिले, इसलिए कहानी संदिग्ध है। हालांकि, अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।

अदालत की टिप्पणी: "घटना 30 जून 2024 की दोपहर को हुई थी, जबकि आरोपी को 2 जुलाई 2024 की सुबह गिरफ्तार किया गया। यह व्यावहारिक रूप से बिल्कुल मुमकिन नहीं है कि घटना के दो दिन बाद भी आरोपी वही कपड़े पहनकर घूम रहा हो जो उसने अपराध के वक्त पहने थे।"

अदालत ने मां और नाना की इस गवाही पर पूरा भरोसा जताया कि उन्होंने घटना के तुरंत बाद आरोपी को खून से सने तौलिए में देखा था।

उम्र की पुष्टि और अंतिम फैसला

पॉक्सो मामलों के स्थापित नियमों के तहत, अदालत ने सबसे पहले बच्ची की उम्र का निर्धारण किया। जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर घटना के दिन बच्ची की उम्र 2 वर्ष, 8 महीने और 17 दिन पाई गई। हालांकि, अदालत ने बच्ची का बयान दर्ज करने का प्रयास (Voir Dire Test) किया, लेकिन इतनी कम उम्र और सदमे के कारण बच्ची कुछ बोल नहीं सकी। इसके बावजूद, मां, नाना और डॉक्टरों के बयानों में पूरी एकरूपता थी।

अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376-AB (12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म), 363 (अपहरण), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 323 (चोट पहुंचाना) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया।

मुआवजा: 30 साल की जेल की सजा के साथ-साथ अदालत ने पीड़िता को 'ओडिशा पीड़ित मुआवजा योजना' और सुप्रीम कोर्ट के निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ (2018) मामले के दिशानिर्देशों के तहत ₹5,00,000 (पाँच लाख रुपये) का मुआवजा देने का भी आदेश जारी किया है।

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