पश्चिम बंगाल SIR: तात्कालिकता साबित होने पर अपीलीय न्यायाधिकरण दे सकते हैं प्राथमिकता से सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में नाम शामिल/हटाए जाने से जुड़ी शिकायतों पर शुक्रवार को महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि प्रभावित व्यक्ति अपनी शेष शिकायतों के निवारण के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट या राज्य में गठित अपीलीय न्यायाधिकरणों का रुख कर सकते हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने कहा कि 13 अप्रैल के आदेश में अधिकांश मुद्दों का समाधान किया जा चुका है, लेकिन रोजमर्रा के आधार पर कुछ नए मुद्दे सामने आ सकते हैं, जिनके लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या अपीलीय न्यायाधिकरण का हस्तक्षेप आवश्यक हो सकता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील दायर की है और जो अत्यावश्यकता का मामला बना सकते हैं, उन्हें अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई दी जाएगी। साथ ही यदि किसी मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता हो, तो प्रभावित व्यक्ति हाईकोर्ट के समक्ष न्यायिक या प्रशासनिक पक्ष से संपर्क कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट कल्याण बंद्योपाध्याय ने अदालत को बताया कि पहले चरण के मतदान से पहले लगभग 27 लाख अपीलों में से केवल 139 का ही निपटारा किया गया, जिससे त्वरित सुनवाई की आवश्यकता सामने आती है।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पक्षकारों को अपनी शिकायतें कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उठाने की स्वतंत्रता दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह निर्देश दिया था कि जिन व्यक्तियों की अपील 21 या 27 अप्रैल तक स्वीकार हो जाती है, उन्हें संबंधित चरण में मतदान की अनुमति दी जाए, हालांकि केवल अपील लंबित होने से किसी को मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा।
पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान संपन्न हुआ, जिसमें लगभग 92 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को प्रस्तावित है।