सर्जन ही सबसे अच्छा जज होता है कि कौन-सा प्रोसीजर अपनाना है: सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल लापरवाही का केस रद्द किया

Update: 2026-04-06 14:48 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को पीडियाट्रिक सर्जन के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इस सर्जन ने डेढ़ साल के बच्चे की ऑर्किडेक्टॉमी (अंडकोष निकालना) की थी। बच्चे के पिता ने आरोप लगाया था कि इस प्रोसीजर के लिए उनकी कोई सहमति नहीं ली गई।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। बच्चे के पिता ने दलील दी कि उन्होंने सिर्फ ऑर्किडोपेक्सी (अंडकोष को सही जगह पर लाने का प्रोसीजर) के लिए सहमति दी थी, लेकिन सर्जन ने कथित तौर पर उनकी मंजूरी के बिना ऑर्किडेक्टॉमी की। पिता ने आरोप लगाया कि सहमति पत्र में हेरफेर करके ऑर्किडेक्टॉमी करने की अनुमति भी जोड़ दी गई।

हाईकोर्ट के फैसले से निराश होकर, जिसने केस रद्द करने से इनकार किया था, सर्जन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। ​​सर्जन ने दलील दी कि सहमति पत्र में कोई हेरफेर नहीं किया गया, और न ही सहमति पत्र भरने के बाद उसमें ऑर्किडेक्टॉमी को जोड़ा गया। सर्जन ने ऑपरेशन का बचाव करते हुए कहा कि सहमति पत्र में ऑर्किडोपेक्सी या ऑर्किडेक्टॉमी में से किसी एक को चुनने का विकल्प मौजूद था। उन्होंने यह भी कहा कि ऑर्किडेक्टॉमी करने के उनके फैसले को मेडिकल बोर्ड की राय का भी समर्थन प्राप्त था।

अपील करने वाले सर्जन की दलीलों में दम पाते हुए जस्टिस मिश्रा द्वारा लिखे गए फैसले में सर्जन के ऑर्किडेक्टॉमी करने के फैसले में कोई गलती नहीं पाई गई। कोर्ट ने कहा कि किसी मरीज का ऑपरेशन करने वाला सर्जन ही सबसे अच्छा जज होता है कि कौन-सा सर्जिकल प्रोसीजर सबसे सही रहेगा, खासकर तब जब उसे मेडिकल बोर्ड की राय का समर्थन प्राप्त हो। मेडिकल बोर्ड ने भविष्य में कैंसर (Malignancy) की संभावनाओं को खत्म करने के लिए ऑर्किडेक्टॉमी को एक विकल्प के तौर पर सही ठहराया था।

कोर्ट ने कहा,

"...मेडिकल बोर्ड की राय में अपनाया गया प्रोसीजर उचित था। इसके अलावा, ऑपरेशन करने वाला सर्जन ही सबसे अच्छा जज होता है कि दोनों प्रोसीजर में से कौन सा अपनाया जाना चाहिए।"

अदालत ने आगे कहा,

“इस मामले में डॉक्टर पर किसी भी तरह की दुर्भावना का आरोप नहीं लगाया गया और इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि किसी मेडिकल प्रक्रिया को करने के लिए सहमति पत्र (Consent Form) भरा गया। इसके अलावा, मेडिकल राय यह है कि डॉक्टर द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया, ऐसी किसी भी मेडिकल आपात स्थिति से निपटने के लिए मान्यता प्राप्त विकल्पों में से एक थी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि मेडिकल बोर्ड की राय यह संकेत देती है कि ऐसी प्रक्रिया सहमति प्राप्त करने के बाद ही की जानी चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है, जो यह दर्शाता हो कि पहले से प्राप्त सहमति पत्र सही क्रम में नहीं था या फिर कोई सहमति प्राप्त ही नहीं की गई। इसके अतिरिक्त, सहमति पत्र को रिकॉर्ड पर Annexure P-2 के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसकी जांच करने पर यह पता चलता है कि जिस कॉलम में प्रस्तावित सर्जरी की प्रकृति का उल्लेख किया जाना था, वहां दोनों प्रकार की सर्जरी—यानी Orchidopexy और Orchiectomy—का उल्लेख एक स्लैश (/) लगाकर किया गया; जिसका अर्थ यह है कि दूसरी सर्जरी, यानी Orchidectomy, उपलब्ध विकल्पों में से एक थी।”

परिणामस्वरूप, अपील स्वीकार की गई और लंबित कार्यवाही रद्द की गई।

Cause Title: DR. S. BALAGOPAL VERSUS STATE OF TAMIL NADU & ANR.

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