सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ मानहानि मामला वापस लेने पर सहमति जताई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दायर उस याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा द्वारा उनके खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले को रद्द करने की मांग की थी। यह आदेश दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते (settlement) के मद्देनज़र पारित किया गया।
जस्टिस एम.एम. सुंदरश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने विवेक तन्खा द्वारा कार्यवाही वापस लेने को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले को बंद कर दिया।
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी, जो शिवराज सिंह चौहान की ओर से पेश हुए, ने अदालत को बताया:
“मेरे मुवक्किल और श्री तन्खा की संसद में मुलाकात हुई और मामला सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझ गया है। श्री तन्खा मेरे मुवक्किल के खिलाफ दायर सिविल मानहानि वाद और आपराधिक मानहानि शिकायत दोनों वापस लेंगे।”
मामले की पृष्ठभूमि
मानहानि से जुड़े ये मामले दिसंबर 2021 में दिए गए कथित बयानों से उत्पन्न हुए थे, जो मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के संदर्भ में दिए गए थे।
इन मामलों में विवेक तन्खा सुप्रीम कोर्ट में वकील के रूप में पेश हुए थे।
तन्खा का आरोप था कि उन्हें OBC आरक्षण के विरोधी के रूप में गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कार्यवाही
इससे पहले, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक मानहानि की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि:
इस चरण पर शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत सामग्री को अस्वीकार नहीं किया जा सकता,
IPC की धारा 499 के तहत सद्भावना और सार्वजनिक हित जैसे अपवादों से जुड़े प्रश्नों का निर्णय ट्रायल के दौरान ही हो सकता है,
मजिस्ट्रेट को संज्ञान के स्तर पर केवल यह देखना होता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं।
इसके बाद, 11 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मानहानि मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी जमानती वारंट से शिवराज सिंह चौहान को राहत दी थी, बशर्ते वे कार्यवाही में सहयोग करें।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली चौहान की याचिका पर नोटिस भी जारी किया था, जिसमें हाईकोर्ट ने शिकायत को रद्द करने से इनकार किया था।
अब, दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के चलते, सुप्रीम कोर्ट ने शिवराज सिंह चौहान की याचिका का निपटारा कर दिया और आपराधिक मानहानि मामले से जुड़ी कार्यवाही समाप्त हो गई।