सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (22 मार्च) को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें न्यूज प्लेटफॉर्म "द ब्लूमबर्ग" को ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड पर अपना कथित मानहानिकारक लेख हटाने का निर्देश दिया गया था।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा देने में ट्रायल कोर्ट के आदेशों ने अस्थायी निषेधाज्ञा देने के 3 गुना ट्रायल को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया।

अदालत ने न केवल कानून के सिद्धांतों को पढ़कर न्यायिक विवेक के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया कि वे विचाराधीन मामले की व्यावहारिकताओं और तथ्यों के अनुरूप हों।

पीठ ने आगे कहा,

"हमारे विचार में हाईकोर्ट को कम से कम प्रथम दृष्टया यह आकलन करना चाहिए कि तथ्यों के मूल्यांकन के बाद निषेधाज्ञा देने के लिए तीन गुना ट्रायल विधिवत स्थापित किया गया, या नहीं। वही त्रुटि, जो ट्रायल जज द्वारा की गई, हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश द्वारा कायम रखा गया। मुख्य रूप से यह दर्ज करना कि प्रथम दृष्टया मामला मौजूद है कि सुविधा का संतुलन प्रतिवादी के लिए निषेधाज्ञा देने के पक्ष में है। इससे अपूरणीय क्षति होगी, यह मामले के तथ्यों के लिए विवेक के आवेदन के बराबर नहीं है। जिन तथ्यों के आधार पर निषेधाज्ञा मांगी गई, उन तथ्यों पर गौर किए बिना त्रिस्तरीय परीक्षण को एक मंत्र के रूप में दर्ज नहीं किया जा सकता... हमारे पास ट्रायल जज के 1 मार्च, 2024 और हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश की दिनांक 14 मार्च, 2024 के दोनों आदेशों को रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।"

दिल्ली हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश पीठ ने 14 मार्च को ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा और एडिशनल जिला जज के निर्देशों का पालन करने के लिए "द ब्लूमबर्ग" को तीन दिन का समय दिया। याचिका 01 मार्च को साकेत कोर्ट के एडिशनल जिला जज हरज्योत सिंह भल्ला द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।

ज़ी एंटरटेनमेंट ने ब्लूमबर्ग टेलीविज़न प्रोडक्शन सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के ऑनलाइन समाचार प्रभाग के खिलाफ मानहानि का कानूनी मामला शुरू किया। इसमें विवादास्पद रिपोर्ट में शामिल लेखक और शोधकर्ता शामिल हैं।

21 फरवरी को ब्लूमबर्ग ने "India Regulator Discovers $ 241 Million Accounting Discrepancy at Zee" शीर्षक के तहत लेख प्रकाशित किया।

सीजेआई ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के पैराग्राफ 9 में दिए गए तर्क, जिस पर बाद में हाईकोर्ट ने भरोसा किया, वर्तमान मामले की तथ्यात्मक खूबियों से पर्याप्त रूप से निपट नहीं पाया है।

आदेश का पैराग्राफ 9 इस प्रकार है:

9. मेरे विचार में वादी ने अंतरिम एकपक्षीय निषेधाज्ञा आदेश पारित करने के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनाया। सुविधा का संतुलन भी वादी के पक्ष में और प्रतिवादी के खिलाफ है। वादी को अपूरणीय क्षति और चोट हो सकती है। यदि प्रार्थना के अनुसार निषेधाज्ञा प्रदान नहीं की जाती है। इसके मद्देनजर, प्रतिवादी नंबर 1 और प्रतिवादी नंबर 2 को इस आदेश की प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दिनांक 21.02.2024 के लेख (वादी के दस्तावेज़ के पृष्ठ 84 से 86) को हटाने का निर्देश दिया जाता है। प्रतिवादियों को सुनवाई की अगली तारीख तक वादी के संबंध में किसी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन प्लेटफॉर्म पर उपरोक्त लेख पोस्ट करने, प्रसारित करने या प्रकाशित करने से रोका जाता है।

पीठ ने आगे स्पष्ट किया कि प्रतिवादी ट्रायल जज के समक्ष नए निषेधाज्ञा आवेदन दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिनके समक्ष विवाद की मुख्य कार्यवाही लंबित है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल जज के लिए किसी भी निषेधाज्ञा के संबंध में नए आदेश पारित करने में पीठ के आदेश का पालन करना आवश्यक होगा।

ट्रायल कोर्ट के समक्ष मुख्य कार्यवाही 26 मार्च को फिर से शुरू होगी।

केस टाइटल: ब्लूमबर्ग टेलीविज़न प्रोडक्शन सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड एसएलपी (सी) नंबर 006696 - / 2024

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