Amazon-Future डील की मंज़ूरी वापस लेने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, कहा - निवेश बढ़ाने के लिए रेगुलेटरी निष्पक्षता ज़रूरी
भारत के रेगुलेटरी माहौल और विदेशी निवेश के नज़रिए पर असर डालने वाले अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 2019 की Amazon-Future Coupons निवेश डील की मंज़ूरी रद्द करके अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन किया। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि मर्जर से जुड़े नियम सख़्त तो होने चाहिए, लेकिन साथ ही वे पहले से पता चलने वाले, निष्पक्ष और कानून के दायरे में होने चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने NCLAT के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ Amazon की अपील मंज़ूर की, जिसमें NCLAT ने CCI के दिसंबर 2021 के आदेश को काफ़ी हद तक सही ठहराया था। CCI के उस आदेश में Amazon के लेन-देन को दी गई मंज़ूरी को रोक दिया गया, उसे नया 'फ़ॉर्म II' नोटिस भरने का निर्देश दिया गया और जानकारी छिपाने व गलत जानकारी देने के आरोप में 202 करोड़ रुपये से ज़्यादा का जुर्माना लगाया गया।
कोर्ट ने कहा कि CCI ने अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन किया। उसने सामने रखी गई जानकारी के कथित "अधूरे ब्यौरे" को, 'प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002' के तहत लेन-देन की जानकारी न देने की पूरी तरह से नाकामी मान लिया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,
"जहां अधिकार और आपसी जुड़ाव, किए गए समझौतों के ज़रिए सामने रखे गए हों और साथ में लगाए गए हों, वहां बाद में विश्लेषण के ब्यौरे में कोई फ़र्क आने से दी गई जानकारी 'गलत जानकारी' में नहीं बदल जाती।"
बेंच ने CCI के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें Amazon के Future Coupons में निवेश को रोक दिया गया और जुर्माना लगाया गया - सिर्फ़ इसलिए कि Amazon ने CCI को संबंधित लेन-देन के ढांचे का ब्यौरा अलग तरीके से दिया था।
व्यापक आर्थिक असर वाली अपनी अहम टिप्पणियों में कोर्ट ने रेगुलेटरी निष्पक्षता को भारत के एक निवेश के लिए आकर्षक जगह होने से जोड़ा।
कोर्ट ने कहा,
"आज के वैश्विक आर्थिक माहौल में एक स्थिर और निष्पक्ष रेगुलेटरी ढांचे का महत्व और भी बढ़ जाता है।"
कोर्ट ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश का बहाव अब ज़्यादातर टैरिफ़, सप्लाई-चेन में बदलाव, भू-राजनीतिक तनाव और बाज़ार की व्यापक अनिश्चितता से तय होता है।
बेंच ने कहा,
"आज के दौर में जब व्यापार और निवेश का बहाव अक्सर टैरिफ़, जवाबी टैरिफ़, सप्लाई-चेन में बदलाव, और बढ़ते भू-राजनीतिक व बाज़ार की अनिश्चितता से प्रभावित होता है, तो अलग-अलग देशों या क्षेत्रों का मूल्यांकन ज़्यादातर उनके संस्थानों की विश्वसनीयता और उनके रेगुलेटरी सिस्टम के पहले से पता चलने वाले स्वरूप के आधार पर किया जाता है।"
बेंच ने आगे कहा,
“जहाँ बाहरी हालात अनिश्चितता पैदा करते हैं, वहां घरेलू संस्थाओं को इसे और नहीं बढ़ाना चाहिए।”
बेंच ने आगे कहा कि कानून के दायरे में काम करने वाला रेगुलेटर “निवेश से जुड़े जोखिम प्रीमियम को कम करता है और बाज़ार के भरोसे को मज़बूत करता है।”
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद Amazon द्वारा 2019 में Future Coupons Pvt. Ltd. (FCPL) में लगभग ₹1,431 करोड़ में 49% हिस्सेदारी खरीदने से शुरू हुआ। FCPL, Future Group का हिस्सा था और उसके पास Future Retail Limited के शेयर थे, जो इस ग्रुप की मुख्य रिटेल शाखा थी।
Amazon ने 23 सितंबर, 2019 को Form I फ़ाइल करके Competition Act की धारा 6(2) के तहत इस सौदे की जानकारी CCI को दी। इस सौदे को 28 नवंबर, 2019 को CCI से मंज़ूरी मिल गई।
हालाँकि, 2021 में CCI ने इस मंज़ूरी की दोबारा समीक्षा की। ऐसा उन शिकायतों के बाद किया गया, जिनमें आरोप लगाया गया कि Amazon ने इस सौदे के असली दायरे को छिपाया था और Future Retail Limited में अपने रणनीतिक हितों का खुलासा नहीं किया।
17 दिसंबर, 2021 के आदेश में CCI ने माना कि Amazon इस सौदे के “असली दायरे” की जानकारी देने में नाकाम रहा था और उसने ज़रूरी जानकारियों को छिपाया था। इसके परिणामस्वरूप, उसने इस मंज़ूरी को रोक दिया, Amazon को नया Form II नोटिफ़िकेशन फ़ाइल करने का निर्देश दिया और Competition Act की धारा 43A, 44 और 45 के तहत जुर्माना लगाया।
CCI के इस फ़ैसले को NCLAT ने भी सही ठहराया था।
CCI/NCLAT के इस फ़ैसले से नाराज़ होकर Amazon ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
Cause Title: AMAZON.COM NV INVESTMENT HOLDINGS LLC VERSUS COMPETITION COMMISSION OF INDIA & ORS