सुप्रीम कोर्ट ने कमर्शियल कोर्ट रूल्स को नोटिफाई करने में देरी पर सवाल उठाया, कहा: हाईकोर्ट डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूशन सेल बनाने पर विचार कर सकते हैं
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 मई) को केंद्र सरकार द्वारा ड्राफ़्ट कमर्शियल कोर्ट रूल्स, 2021 को नोटिफाई न करने की गंभीर रूप से आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि देश को एग्जीक्यूशन याचिकाओं (अदालती आदेशों को लागू करने वाली याचिकाओं) के प्रभावी और तेज़ी से निपटारे में "बड़ी चुनौती" का सामना करना पड़ रहा है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने इस बात का स्वतः संज्ञान लिया कि "ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस" (व्यापार करने में आसानी) पर कानून और न्याय मंत्रालय के टास्क फ़ोर्स द्वारा तैयार किए गए ड्राफ़्ट कमर्शियल कोर्ट रूल्स, 2021, लगभग चार सालों से नोटिफाई नहीं किए गए। इसलिए कोर्ट ने मंत्रालय से इन नियमों को नोटिफाई करने में हुई देरी के बारे में स्पष्टीकरण मांगा।
कोर्ट ने कहा,
"हम जानना चाहते हैं कि इन नियमों को अब तक नोटिफाई क्यों नहीं किया गया। ड्राफ़्ट रूल्स, 2021 को एक उद्देश्य के साथ, या दूसरे शब्दों में कहें तो, एक खास लक्ष्य के साथ तैयार किया गया। इस संबंध में हम माननीय एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से अनुरोध करेंगे कि वे संबंधित मंत्रालय से उचित निर्देश लें और अगली सुनवाई की तारीख पर कोर्ट को सूचित करें।"
कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि यदि केंद्र निकट भविष्य में इन नियमों को नोटिफाई करने का इच्छुक नहीं है तो हाईकोर्ट संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अपनी पर्यवेक्षी शक्तियों का उपयोग करते हुए डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूशन सेल स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं। इस संबंध में कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से उनके विचार मांगे।
कोर्ट ने कहा,
"पूरे देश में एग्जीक्यूशन याचिकाओं के प्रभावी और तेज़ी से निपटारे के मामले में हम पहले से ही एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। हमारा मानना है कि सभी न्यायिक जिलों में डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूशन सेल की स्थापना से एग्जीक्यूशन याचिकाओं के प्रभावी और तेज़ी से निपटारे में मदद मिल सकती है।"
कोर्ट ने ड्राफ़्ट नियमों के अध्याय XII के नियम 51 का संज्ञान लिया, जिसका शीर्षक है "डिक्री का निष्पादन और डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूशन सेल की स्थापना"। यह नियम यह प्रावधान करता है कि हाईकोर्ट सभी न्यायिक जिलों में एक समर्पित डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूशन सेल का गठन करेगा।
नियम के अनुसार, निष्पादन प्रकोष्ठ (Execution Cell) भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की 'न्याय मित्र योजना' के तहत कार्य करेगा। यह प्रकोष्ठ प्रधान जिला जज के प्रशासनिक नियंत्रण में रहेगा और इसमें निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे:-
(i) सदस्य सचिव – कोई सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी अथवा विधि पृष्ठभूमि वाला कोई सेवानिवृत्त 'वर्ग-I' (Class-I) सरकारी अधिकारी, जो डिक्री धारकों को डिक्री आदि के समयबद्ध निष्पादन में मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
(ii) सदस्य (बैंकिंग) – किसी राष्ट्रीयकृत बैंक का सेवारत अधिकारी, जिसका पद 'प्रबंधक' (Manager) से कम न हो, जो सदस्य सचिव की सहायता करेगा।
(iii) सदस्य (राजस्व) – राजस्व सेवा से लिया गया कोई अधिकारी, जिसका पद 'तहसीलदार' से कम न हो, जो सदस्य सचिव की सहायता करेगा।
(iv) सदस्य (पुलिस) – राज्य पुलिस से लिया गया कोई अधिकारी, जिसका पद 'निरीक्षक' (Inspector) से कम न हो, जो सदस्य सचिव की सहायता करेगा।
रजिस्ट्री को यह निर्देश दिया गया कि वह इस आदेश की प्रतियां सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरलों को परिचालित करे ताकि वे इन्हें अपने-अपने चीफ जस्टिस के समक्ष प्रस्तुत कर सकें। ऐसा इसलिए किया जाना है ताकि संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अपने पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए 'जिला निष्पादन प्रकोष्ठों' की स्थापना के संबंध में उनके विचार प्राप्त किए जा सकें।
Cause Title: PERIYAMMAL (DEAD THR. LRS.) & ORS. VERSUS V. RAJAMANI & ANR.