कर्मचारियों को पुराने सेवा नियमों के तहत प्रमोशन मांगने का निहित अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-05-19 08:19 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों को केवल इस आधार पर पदोन्नति (Promotion) का अधिकार नहीं मिल जाता कि रिक्तियां पुराने सेवा नियमों (Old Service Rules) के दौरान उत्पन्न हुई थीं।

अदालत ने कहा कि सरकार को सेवा नियमों में बदलाव कर चयन और पदोन्नति की प्रक्रिया बदलने का अधिकार है, बशर्ते यह निर्णय मनमाना न हो।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ओडिशा परिवहन विभाग के कर्मचारियों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।

कर्मचारियों ने Assistant Regional Transport Officer (ARTO) पद पर पदोन्नति की मांग की थी। उनका तर्क था कि पुराने नियमों के तहत वे पदोन्नति के पात्र थे क्योंकि रिक्तियां उसी समय उत्पन्न हुई थीं।

हालांकि, राज्य सरकार ने 2017 में कैडर पुनर्गठन (Cadre Restructuring) किया और बाद में 2021 के नए नियम लागू कर दिए, जिनके तहत ARTO पद को चयन पद (Selection Post) बना दिया गया और भर्ती प्रक्रिया ओडिशा लोक सेवा आयोग (OPSC) के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा द्वारा तय की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को पदोन्नति का “निहित अधिकार” (Vested Right) या “वैध अपेक्षा” (Legitimate Expectation) प्राप्त नहीं होती।

अदालत ने यह भी कहा कि चयन की प्रक्रिया तय करना सरकार की नीतिगत शक्ति (Policy Decision) का हिस्सा है और यदि सरकार पदों के पुनर्गठन के बाद नई प्रक्रिया अपनाती है, तो उसे गलत नहीं ठहराया जा सकता।

इसके साथ ही कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पुराने नियमों के तहत कर्मचारियों के प्रमोशन पर विचार करने के निर्देश दिए गए थे।

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