सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में रिहायशी इलाकों को कमर्शियल ज़ोन में बदलने के बड़े पैमाने पर हो रहे मामलों की जांच के आदेश दिए

Update: 2026-04-04 15:28 GMT

एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में बिल्डिंग बाय-लॉ के बड़े पैमाने पर हो रहे उल्लंघन और रिहायशी इलाकों को कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बिना इजाज़त बदलने के मामलों का गंभीरता से संज्ञान लिया।

कोर्ट ने कहा,

"हमारे सामने ऐसे मामले भी आ रहे हैं, जिनमें रिहायशी कॉलोनियों को रिहायशी इमारतों और ज़मीनों का कमर्शियल मकसद से बिना इजाज़त इस्तेमाल करके कमर्शियल इलाकों में बदला जा रहा है। ऐसी हरकतें न सिर्फ कानून और जनहित के खिलाफ हैं, बल्कि उन असली निवासियों के लिए भी बड़ी परेशानी और नुकसान का सबब बनती हैं, जिन्होंने प्रॉपर्टी खरीदने और अपने घर बनाने में काफी पैसा लगाया। समाज के बेईमान तत्वों द्वारा इस तरह के गलत इस्तेमाल के पर्यावरणीय और नागरिक नतीजे भी उतने ही गंभीर हैं और इनके दूरगामी असर हो सकते हैं।"

चेन्नई में एक रिहायशी कॉलोनी के कमर्शियल मकसद से बिना इजाज़त इस्तेमाल से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने 25 मार्च, 2026 के अपने आदेश में इस मुद्दे की पूरे भारत के स्तर पर जांच करने के लिए याचिका का दायरा बढ़ा दिया। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों के नगर निगम अधिकारियों को इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया और उनसे विस्तृत हलफनामे दाखिल करने को कहा।

कोर्ट ने उक्त नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे "अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में एक व्यापक जांच करें, ताकि उन इलाकों की पहचान की जा सके, जो विशेष रूप से रिहायशी इस्तेमाल के लिए तय किए गए, लेकिन संबंधित लोगों द्वारा गैर-रिहायशी मकसद से उनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।"

कोर्ट ने आदेश दिया,

"ऐसे मामलों की एक विस्तृत सूची तैयार की जाएगी और हलफनामों के ज़रिए इस कोर्ट के सामने पेश की जाएगी; इन हलफनामों पर संबंधित निगमों/नगर पालिकाओं के आयुक्तों के व्यक्तिगत हस्ताक्षर होने चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया में उनका पूरा अधिकार क्षेत्र शामिल होगा, जिसमें वे सभी 'द्वीप' (Islands) भी शामिल हैं जो तकनीकी रूप से खुद को ऐसे निगमों/नगर पालिकाओं की सीमा से बाहर होने का दावा कर सकते हैं, लेकिन वे निगम/नगर पालिका क्षेत्र के अंदर या उसके चारों ओर स्थित हैं (यदि कोई हों)। साथ ही सभी रिहायशी कॉलोनियां, ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और इसी तरह के विकसित/विकासशील इलाके भी इसमें शामिल होंगे।"

इस मामले में कोर्ट की सहायता के लिए उसने सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा को 'एमिक्स क्यूरी' (न्याय मित्र) नियुक्त किया।

रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि वह नए जोड़े गए प्रतिवादियों को नोटिस जारी करे।

मामले को 20 मई, 2026 को सुनवाई के लिए बोर्ड में सबसे ऊपर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।

Cause Title: LOGANATHAN VERSUS THE STATE OF TAMIL NADU & ORS.

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