अगस्ता वेस्टलैंड केस: प्रत्यर्पण संधि के प्रावधान को चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने आज अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में भारत-यूएई प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 17 को चुनौती दी गई है, जो प्रत्यर्पण के बाद संबंधित अपराधों में भी अभियोजन की अनुमति देता है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ता की दलील
मिशेल की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहते हुए गलती की कि अंतरराष्ट्रीय संधि संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर हो सकती है। उनका कहना था कि संधि का अनुच्छेद 17, Extradition Act, 1962 (प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962) की धारा 21 के विपरीत है, जो स्पष्ट रूप से कहती है कि प्रत्यर्पित व्यक्ति पर केवल उन्हीं अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है जिनके लिए प्रत्यर्पण हुआ है।
याचिका में यह भी कहा गया कि अनुच्छेद 17 संविधान के अनुच्छेद 21, 245 और 253 का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह “संबंधित अपराधों” के लिए भी मुकदमा चलाने की अनुमति देता है।
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 21 और संधि के अनुच्छेद 17 में कोई टकराव नहीं है। कोर्ट ने माना कि प्रत्यर्पण आदेश और उसके आधारभूत तथ्यों के दायरे में आने वाले अपराधों पर अभियोजन चलाया जा सकता है, और यह संधि के अनुरूप है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि भारत और यूएई जैसे संप्रभु देशों ने आपसी सहमति से प्रत्यर्पण के सिद्धांत तय किए हैं, जिनमें संबंधित अपराधों के लिए भी मुकदमा चलाने की अनुमति शामिल है।
मामला क्या है?
सीबीआई के अनुसार, वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे में 6000 मीटर की उड़ान ऊंचाई की शर्त को घटाकर 4500 मीटर किया गया ताकि अगस्ता वेस्टलैंड को फायदा पहुंचाया जा सके और इसके बदले रिश्वत दी गई।
मिशेल पर आरोप है कि उसने बिचौलिए के रूप में काम करते हुए रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना में अपने संपर्कों का इस्तेमाल किया और गोपनीय दस्तावेज साझा किए।
सीबीआई ने इस सौदे में करीब 398.21 मिलियन यूरो (लगभग 2666 करोड़ रुपये) के नुकसान का आरोप लगाया है। वहीं, ED ने आरोप लगाया कि मिशेल को इस सौदे में लगभग 30 मिलियन यूरो (करीब 225 करोड़ रुपये) मिले।
पृष्ठभूमि
मिशेल को 4 दिसंबर 2018 को दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था। उसने यह दलील दी कि उसका प्रत्यर्पण केवल आईपीसी की धारा 415 और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 के तहत हुआ था, इसलिए उसे अन्य धाराओं में मुकदमे का सामना नहीं करना चाहिए।
हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी इस दलील को खारिज कर दिया था और रिहाई की मांग भी अस्वीकार कर दी थी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी 2025 को सीबीआई मामले में और दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 मार्च 2025 को ईडी मामले में मिशेल को जमानत दी थी, लेकिन जमानत की शर्तें पूरी न करने के कारण वह अब भी हिरासत में है।