गैर-मिजो पुरुष से शादी करने वाली मिजो महिलाओं को बाहर करने वाले कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर The Mizo Marriage and Inheritance of Property (Amendment) Act, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह कानून गैर-मिजो पुरुषों से विवाह करने वाली मिजो महिलाओं और उनके बच्चों के साथ भेदभाव करता है।
याचिका में कहा गया है कि संशोधित कानून के तहत अब यह अधिनियम केवल उन विवाहों पर लागू होगा, जहां दोनों पति-पत्नी मिजो हों या केवल पति मिजो हो। इसका प्रभाव यह होगा कि यदि कोई मिजो महिला गैर-मिजो पुरुष से विवाह करती है, तो वह इस कानून के दायरे से बाहर हो जाएगी, जबकि मिजो पुरुष को यह संरक्षण मिलता रहेगा, चाहे उसकी पत्नी किसी भी समुदाय की हो।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह महिलाओं के साथ लैंगिक आधार पर भेदभाव करता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि संशोधित परिभाषा के तहत अब “मिजो” पहचान को पितृसत्तात्मक आधार से जोड़ा गया है और केवल उन्हीं बच्चों को मिजो माना जाएगा, जिनके पिता मिजो समुदाय से हों।
याचिका के अनुसार, इन संशोधनों का असर केवल विवाह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं के संपत्ति, उत्तराधिकार, सामुदायिक भूमि अधिकार और अनुसूचित जनजाति से जुड़े संरक्षणों पर भी पड़ेगा।
याचिकाकर्ता एक मिजो महिला हैं, जिन्होंने वर्ष 1984 में एक गैर-मिजो पुरुष से विवाह किया था।