थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप जलाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की हिंदू धर्म परिषद की याचिका

Update: 2026-06-04 10:40 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के शीर्ष पर दीप जलाने की अनुमति मांगने वाली हिंदू धर्म परिषद की याचिका खारिज कर दी गई थी। हालांकि, अदालत ने हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई ₹50,000 की लागत को अत्यधिक मानते हुए उसे घटाकर ₹5,000 कर दिया।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने के पक्ष में नहीं है, लेकिन मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए लागत की राशि कम की जा सकती है।

मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस एन. सतीश कुमार और जस्टिस एम. जोतिरामन की खंडपीठ ने 9 अप्रैल को याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया था। अदालत ने ऐसी याचिकाओं को राजनीतिक लाभ के लिए दायर किए जाने की प्रवृत्ति की भी आलोचना की थी।

मामला थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम जलाने को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा है। इससे पहले हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने मंदिर प्रबंधन को पहाड़ी पर स्थित एक पत्थर के स्तंभ पर दीप जलाने की अनुमति दी थी। बाद में राज्य सरकार द्वारा आदेश लागू न किए जाने पर अवमानना याचिकाएं दायर हुईं और अदालत ने श्रद्धालुओं को सुरक्षा के साथ दीप जलाने की अनुमति भी दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में हिंदू धर्म परिषद ने आरोप लगाया कि राज्य अधिकारियों ने हिंदुओं को पहाड़ी पर दीप जलाने से रोका, जबकि अन्य समुदायों को वहां जाने की अनुमति दी गई। परिषद ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका के मूल मुद्दों पर हस्तक्षेप से इनकार करते हुए केवल लागत की राशि कम करने का आदेश दिया।

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