खाड़ी देशों के 12वीं के छात्रों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से मांगा जवाब, परीक्षा रद्द होने के बाद अपनाई गई मूल्यांकन नीति को दी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाएं रद्द होने के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा अपनाई गई विशेष मूल्यांकन नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर CBSE से जवाब मांगा।
जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की अवकाशकालीन पीठ ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन के सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों में पढ़ने वाले 30 नियमित छात्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2025-26 की बोर्ड परीक्षाएं पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव तथा सुरक्षा कारणों से कई विषयों में रद्द कर दी गई थीं। इसके बाद CBSE ने 27 मार्च, 2026 को विशेष मूल्यांकन नीति जारी की, जिसके तहत रद्द हुई परीक्षाओं के अंक विद्यालय स्तर की त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के आधार पर तय किए गए।
याचिका में कहा गया कि इस मूल्यांकन पद्धति के कारण छात्रों को सामान्य बोर्ड परीक्षा की तुलना में काफी कम अंक मिले, जिससे उनके उच्च शिक्षा में प्रवेश की संभावनाएं प्रभावित हुई ।
याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से कहा कि विदेश में रहने वाले भारतीय छात्रों के लिए प्रत्यक्ष प्रवेश योजना तथा खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीयों के बच्चों के लिए निर्धारित प्रवेश योजना के तहत प्रवेश के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। विशेष मूल्यांकन नीति के कारण कई छात्र इस पात्रता से वंचित हो गए।
याचिका के अनुसार कई ऐसे छात्र जिन्होंने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) उत्तीर्ण कर ली है, वे केवल CBSE द्वारा दिए गए अंकों के कारण प्रवेश के लिए अयोग्य हो गए। कुछ छात्रों को अनुत्तीर्ण या पूरक परीक्षा की श्रेणी में भी रखा गया जबकि उनका शैक्षणिक प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है।
याचिकाकर्ताओं की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करने का निर्णय लिया।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि याचिका की एक प्रति भारत के सॉलिसिटर जनरल को उपलब्ध कराई जाए ताकि वह मामले में अदालत की सहायता कर सकें।