चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना नंबर वाले वाहनों पर कार्रवाई और CCTV निगरानी के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (26 मई) को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य (NCGS) में जारी अवैध रेत खनन पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र और संबंधित राज्यों को सख्त निर्देश जारी किए। कोर्ट ने हिंदुस्तान टाइम्स की उस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें मोरेना जिले में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों से खुलेआम अवैध रेत खनन और परिवहन की बात कही गई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू से पूछा कि क्या उन्होंने रिपोर्ट देखी है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों के बावजूद बिना नंबर प्लेट वाले वाहन रेत ढोते दिखाई दे रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि रिपोर्ट सही है तो राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे गलत साबित हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए अब और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को कई अहम निर्देश दिए।
कोर्ट ने तीनों राज्यों को वन विभाग में खाली पदों पर जल्द भर्ती करने, CCTV और निगरानी सिस्टम लगाने, अवैध खनन में इस्तेमाल हो रहे वाहनों को जब्त करने और उनके मालिकों, फाइनेंसरों व ठेकेदारों के खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि NH-44 पर मोरेना-धौलपुर सीमा के पास हाई-रिजॉल्यूशन नाइट विजन CCTV कैमरे लगाए जाएं, ताकि नदी क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखी जा सके। इन कैमरों की लाइव फीड पुलिस और वन विभाग को उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया गया।
कोर्ट ने राज्यों से यह भी कहा कि वे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्किल डेवलपमेंट योजनाएं शुरू करें, ताकि लोग अवैध खनन पर निर्भर न रहें। साथ ही स्थानीय समुदायों को संरक्षण, इको-टूरिज्म और पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
यह मामला राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन से जुड़ा है, जो घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और रेड-क्राउन्ड रूफ टर्टल जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों का महत्वपूर्ण आवास माना जाता है।