बांग्लादेश भेजे गए बंगाली भाषी लोगों को केंद्र ने भारत वापस बुलाया, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएं निपटाईं
केंद्र सरकार द्वारा बांग्लादेश भेजे गए कुछ बंगाली भाषी लोगों को विशेष मामले के तौर पर भारत वापस लाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र की याचिकाओं का निपटारा किया।
ये याचिकाएं कलकत्ता हाईकोर्ट के उन आदेशों के खिलाफ दायर की गई थीं, जिनमें भारतीय नागरिकता पर संदेह के आधार पर बांग्लादेश भेजे गए लोगों को वापस भारत लाने का निर्देश दिया गया था।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ केंद्र की चुनौती पर सुनवाई कर रही थी। केंद्र ने अदालत को बताया कि संबंधित लोगों को विशेष मामले के तौर पर भारत वापस लाया गया।
इसके बाद मामले में तत्काल विवाद समाप्त हो गया। संबंधित पक्षों की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के हस्तक्षेप से तत्काल समस्या का समाधान हो गया।
हेगड़े ने अदालत से कहा,
“मैं उनके हस्तक्षेप के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मामला अपने आप सुलझ गया। वे सभी वापस आ गए।”
इससे पहले मई में सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिया कि संबंधित लोगों को मानवीय आधार पर भारत वापस लाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत लाने के बाद उनकी नागरिकता की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा और भारत में उनका आगे रहना उस सत्यापन के परिणाम पर निर्भर करेगा।
संबंधित लोगों के वापस आने के बाद सीनियर एडवोकेट ने सुझाव दिया कि मूल कानूनी सवाल को खुला रखते हुए मामले का निपटारा किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के रुख को रिकॉर्ड करते हुए कहा कि उसे सूचित किया गया कि विशेष मामले के तौर पर प्रतिवादियों को वापस लाया गया।
अदालत ने कहा कि जब संबंधित लोग भारत लौट चुके हैं तो अब इन कार्यवाहियों को लंबित रखने का कोई कारण नहीं है।
पीठ ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि मामले से जुड़ा कानूनी सवाल खुला रखा गया है। यानी अदालत ने इस मुद्दे पर कोई अंतिम कानूनी राय नहीं दी।
यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के सितंबर 2025 के आदेशों से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने बांग्लादेश भेजे गए लोगों के परिजनों की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुनाली खातून, उनके पति दानिश शेख और बेटे साबिर शेख को भारत वापस लाने का निर्देश दिया था।
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने स्वीटी बीबी और उनके बेटों कुर्बान तथा इमाम को भी भारत वापस लाने का निर्देश दिया था।
दिसंबर 2025 में केंद्र ने मानवीय आधार पर गर्भवती सुनाली खातून और उनके बेटे को भारत वापस लाने पर सहमति जताई। इससे पहले नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को संबंधित लोगों को भारत वापस लाकर उनकी नागरिकता के दावे का सत्यापन करने पर विचार करने का सुझाव दिया।
अब संबंधित लोगों के भारत लौटने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिकाओं का निपटारा किया, जबकि नागरिकता और उससे जुड़े मूल कानूनी सवालों पर निर्णय का रास्ता खुला रखा।