सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी और जाली मेडिकल डिग्रियों के मुद्दे पर एक अधिवक्ता द्वारा दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने खुद अदालत में पेश होकर मेडिकल नियमों के ऑडिट और इस मुद्दे की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की थी।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने याचिकाकर्ता को इस तरह की याचिकाएं नियमित रूप से दाखिल करने से बचने की सलाह दी।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि याचिकाकर्ता हर सप्ताह एक जनहित याचिका दाखिल कर रहे हैं और सवाल किया कि क्या याचिकाएं दाखिल करने से पहले उनके द्वारा प्रार्थनाओं पर उचित विचार किया जाता है।

उन्होंने कहा कि केवल इसलिए बार-बार रिट याचिका दाखिल नहीं की जानी चाहिए क्योंकि कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से दाखिल कर सकता है और इससे प्रचार मिल सकता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से ऐसी याचिकाओं के जरिए अदालत पर अनावश्यक बोझ न डालने को कहा।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका के समर्थन में आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि चार में से कम से कम एक डॉक्टर के पास फर्जी या जाली डिग्री है। उन्होंने दलील दी कि याचिका महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा उठाती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

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