'हलफनामा नहीं, स्पष्टीकरण मांगा था': AIIMS के एक्टिंग डायरेक्टर को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

Update: 2026-07-09 14:36 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने डीएनए परीक्षण में हुई देरी से जुड़े एक मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के कार्यवाहक निदेशक (Acting Director) के रवैये पर कड़ी नाराज़गी जताई। कोर्ट ने कहा कि उससे "स्पष्टीकरण (Explanation)" मांगा गया था, लेकिन उन्होंने इसके बजाय "हलफनामा (Affidavit)" दाखिल किया, जो अदालत के निर्देशों के अनुरूप नहीं था।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने शुरुआत में कार्यवाहक निदेशक के खिलाफ अवमानना (Contempt) की कार्यवाही शुरू करने और उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि कार्यवाहक पद पर होने से जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती और पद पर बैठे अधिकारी को न्यायालय के आदेशों का पालन करना ही होगा।

मामला एक ऐसे प्रकरण से जुड़ा था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में एक बच्चे का डीएनए परीक्षण कराने का निर्देश दिया था। हालांकि निर्धारित समयसीमा तक परीक्षण नहीं कराया गया। AIIMS ने देरी का कारण संबंधित अधिकारी के सेवानिवृत्त हो जाने को बताया, जिसे अदालत ने अस्वीकार्य माना और कहा कि आवश्यकता होने पर संस्थान अदालत से उचित अनुमति मांग सकता था।

बाद में जब अदालत ने कार्यवाहक निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा, तब उन्होंने "स्पष्टीकरण" के स्थान पर "हलफनामा" दाखिल किया। इस पर जस्टिस अमानुल्लाह ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, "हमने आपसे स्पष्टीकरण मांगा था। आप हमें जवाब दे रहे हैं? 'Explanation' शब्द इस्तेमाल करने में क्या शर्म है? अदालत के आदेशों के प्रति इतना लापरवाह रवैया क्यों?"

हालांकि, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के अनुरोध पर पीठ ने कार्यवाहक निदेशक को हलफनामे में संशोधन कर उसे "स्पष्टीकरण" के रूप में दाखिल करने की अनुमति दे दी। चूंकि कार्यवाहक निदेशक ने बिना शर्त माफी मांग ली थी और डीएनए परीक्षण भी पूरा हो चुका था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना संबंधी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई और मामला बंद कर दिया।

Tags:    

Similar News