सुप्रीम कोर्ट ने 'नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स एक्ट' के तहत नियम बनाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया

Update: 2026-08-10 13:45 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने 'फेडरेशन ऑफ सेल्फ फाइनेंसिंग टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस' (FSFTI) की रिट याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में 'नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) एक्ट, 2021' के तहत अनिवार्य नियम बनाने की मांग की गई।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने केंद्र सरकार, 'नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स', 'आईके गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी' (IKGPTU) और 'महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी' (MRSPTU) को नोटिस जारी किया।

वकील मीनेश दुबे ने तर्क दिया कि एक्ट लागू होने के पांच साल बाद भी कोई औपचारिक नियम नहीं बनाए गए। इससे यह सेक्टर अनिश्चितता की स्थिति में है क्योंकि यह ज़्यादातर बदलते हुए एग्जीक्यूटिव सर्कुलर, नोटिस, सुधार (corrigenda) और कम्युनिकेशन से चलता है, जिससे देश भर के संस्थानों, यूनिवर्सिटीज़ और छात्रों को लगातार और कभी न ठीक होने वाला नुकसान हो रहा है।

दुबे ने NEET परीक्षा का उदाहरण दिया, जिसे 'बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी' (BPT) और 'बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी' (BOT) कोर्स के लिए अनिवार्य योग्यता बना दिया गया, लेकिन दो महीने से भी कम समय में इसे वापस ले लिया गया, जिससे छात्रों में अनिश्चितता पैदा हो गई।

उन्होंने यह भी बताया कि एक्ट की धारा 22(1) के अनुसार, हर राज्य सरकार के लिए 6 महीने के भीतर एक 'स्टेट काउंसिल' बनाना अनिवार्य था। हालांकि, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, पुडुचेरी, लद्दाख और लक्षद्वीप जैसे राज्य काउंसिल बनाने में विफल रहे हैं।

उन्होंने कहा:

"NCAHP, 2021 के तहत पिछले पांच वर्षों में कोई नियम नहीं बनाया गया, माय लॉर्ड्स। माय लॉर्ड्स, उन्होंने एक पत्र जारी करके मानदंड बदल दिए। दस राज्यों में कोई स्टेट काउंसिल नहीं है।"

इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा:

"हमने पहले ही एक बार निर्देश दिया था।"

बता दें, 'जॉइंट फोरम ऑफ मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया बनाम UOI (2024)' मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया कि वह 12 अक्टूबर, 2024 या उससे पहले एक्ट के प्रावधानों को लागू करने के लिए ज़रूरी कदम उठाएं और इस पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें।

इसके बाद 'डॉ. दयाल इंस्टीट्यूट ऑफ़ पैरामेडिकल टेक्नोलॉजी बनाम राजस्थान राज्य (2026)' मामले में कोर्ट ने ऑफिसर-इन-चार्ज को बुलाकर देरी की वजह बताने को कहा और कहा कि नियमों को लागू करने में हो रही लगातार देरी से "पूरी प्रक्रिया ठप पड़ रही है"। हालांकि, 9 अप्रैल को बेंच ने मामले का निपटारा कर दिया, क्योंकि कमीशन ने बताया था कि नियम बनाने का काम चल रहा है।

दुबे ने आगे कहा कि दो यूनिवर्सिटीज़, IKGPTU और MRSPTU ने एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफ़ेशन कोर्स कराने वाले संस्थानों को 42वें एकेडमिक ईयर के लिए मान्यता नहीं दी, और इसकी आखिरी तारीख 14 अगस्त है। उन्होंने बताया कि 20,000 लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं।

FSFTI ने अपने प्रेसिडेंट डॉ. अंशु कटारिया के ज़रिए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। उन्होंने मांग की कि रेस्पॉन्डेंट्स 2021 के एक्ट की धारा 11, 22, 40 और 60 के तहत एडमिशन, एलिजिबिलिटी वगैरह से जुड़े कानूनी नियम बनाएं और उन्हें नोटिफ़ाई करें।

Case Details: FEDERATION OF SELF FINANCING TECHNICAL INSTITUTIONS (FSFTT) AND ORS. Versus UNION OF INDIA AND ORS| W.P.(C) No. 972/2026

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