'संसद चलो' प्रदर्शन: SCBA अध्यक्ष ने PMO और गृह मंत्रालय को लिखा पत्र, पुलिस कमिश्नर के निलंबन व न्यायिक जांच की मांग

Update: 2026-07-23 07:16 GMT

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने 'संसद चलो' छात्र प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है।

उन्होंने पुलिस कार्रवाई की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में समयबद्ध न्यायिक जांच, दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और दिल्ली पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) के तत्काल निलंबन की मांग की है।

अपने पत्र में विकास सिंह ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों, वकीलों, महिलाओं और नाबालिगों पर अनुपातहीन (Disproportionate) बल प्रयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े के बेटे सहित कई अधिवक्ताओं के साथ पुलिस ने मारपीट की।

साथ ही, आंसू गैस, दंगा नियंत्रण बल के इस्तेमाल और घटनाओं की रिकॉर्डिंग कर रहे पत्रकारों को रोकने के आरोपों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों, घायलों की मदद कर रहे लोगों और पत्रकारों के खिलाफ बल प्रयोग संवैधानिक व्यवस्था के गंभीर क्षरण का संकेत है।

उनके अनुसार, यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 148 और दिल्ली पुलिस मैनुअल के भी विपरीत है, क्योंकि कानून के अनुसार किसी भी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग अंतिम उपाय (Last Resort) होना चाहिए, पहला नहीं।

विकास सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में पुलिस ने कमर के ऊपर लाठीचार्ज किया, जो निर्धारित दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मियों ने अपने नेम प्लेट भी नहीं पहन रखे थे।

पत्र में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कई बार स्पष्ट कर चुका है कि अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के खिलाफ पुलिस बल का प्रयोग न्यूनतम, निवारक (Preventive) और गैर-दंडात्मक (Non-Punitive) होना चाहिए।

आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

विकास सिंह ने कहा कि छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि परीक्षा संस्थाओं की लगातार विफलताओं, पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं ने उनके भविष्य और समान अवसर के अधिकार को प्रभावित किया है।

उन्होंने छात्रों में बढ़ती आत्महत्याओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जब व्यवस्था जवाबदेही स्वीकार नहीं करती, तब युवाओं के पास शांतिपूर्ण विरोध के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

अपने पत्र में उन्होंने यूट्यूबर समदीश के वीडियो और The Wire, Scroll तथा Newslaundry की रिपोर्टों का भी हवाला दिया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) भी पहले ही छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई की निंदा कर स्वतंत्र जांच की मांग कर चुके हैं।

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।

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