रिलायंस द्वारा KG Besin से यूपी को गैस की सप्लाई 'इंटर-स्टेट सेल', VAT लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-05-16 04:13 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को यह फैसला दिया कि आंध्र प्रदेश के KG-D6 बेसिन से दूसरे राज्य के खरीदारों को प्राकृतिक गैस की बिक्री, सेंट्रल सेल्स टैक्स एक्ट, 1956 की धारा 3(a) के तहत एक 'इंटर-स्टेट सेल' (अंतर-राज्यीय बिक्री) है, और इसलिए इस पर राज्य का वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लागू नहीं होता।

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर अपीलों का समूह खारिज किया। ये अपीलें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) द्वारा KG-D6 बेसिन से उत्तर प्रदेश के खरीदारों को की गई प्राकृतिक गैस की सप्लाई को 'इंटर-स्टेट सप्लाई' के तौर पर वर्गीकृत किए जाने के खिलाफ दायर की गई थीं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के भीतर प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर राज्य VAT लगाने की मांग की थी। साथ ही इसे 'इंट्रा-स्टेट' (राज्य के भीतर की) सप्लाई के तौर पर वर्गीकृत किया था। हालांकि, कोर्ट ने सरकार के इस रुख को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गैस बिक्री और खरीद समझौते (GSPA) की शर्तों के अनुसार, एक बार जब गैस की पैमाइश (metering) हो जाती है, उसे डिलीवर कर दिया जाता है और आंध्र प्रदेश में खरीदार के ट्रांसपोर्टर को उसका मालिकाना हक (title) सौंप दिया जाता है, तो बिक्री उसी समय पूरी मानी जाती है।

कोर्ट ने आगे कहा,

"इसके बाद गैस का आपस में मिलना (Commingling) और उत्तर प्रदेश के औरैया में उसकी दोबारा पैमाइश होना, केवल परिवहन से जुड़ी घटनाएं थीं... और ये VAT एक्ट के तहत टैक्स लगाने का कोई नया आधार नहीं बन सकतीं।"

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद KG-D6 बेसिन से निकाली गई प्राकृतिक गैस की बिक्री से जुड़ा है। यह बेसिन आंध्र प्रदेश के तट के पास स्थित है। यहां से गैस निकालने का काम रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा किया जाता है। रिलायंस, भारत सरकार के साथ हुए 'प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट' के तहत एक अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम के ऑपरेटर के तौर पर काम कर रही है।

'गैस बिक्री और खरीद समझौतों' (GSPAs) के तहत रिलायंस ने उत्तर प्रदेश में स्थित उर्वरक निर्माताओं को गैस बेचने पर सहमति जताई थी। इन समझौतों में यह स्पष्ट किया गया कि गैस की डिलीवरी आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के पास स्थित गदिमोगा में की जाएगी। इसके बाद गैस को RGTIL और GAIL द्वारा संचालित पाइपलाइनों के माध्यम से गुजरात होते हुए उत्तर प्रदेश तक पहुंचाया गया।

इस तरह की संविदात्मक (Contractual) व्यवस्था होने के बावजूद, वर्ष 2010 में उत्तर प्रदेश सरकार ने गैस की सप्लाई पर 21% की दर से VAT लगाने का प्रयास किया। सरकार ने यह तर्क दिया कि जैसे ही गैस 'कॉमन कैरियर पाइपलाइन सिस्टम' में प्रवेश करती है और उत्तर प्रदेश में डिलीवर होती है, तो यह बिक्री प्रभावी रूप से एक 'इंट्रा-स्टेट' (राज्य के भीतर की) बिक्री बन जाती है। राज्य ने यह भी तर्क दिया कि चूंकि पाइपलाइन में मौजूद गैस दूसरों की गैस के साथ मिल गई और एक जैसी हो गई, इसलिए इस बिक्री को गादिमोगा में पूरी हुई बिक्री नहीं माना जा सकता।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

फैसला

हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए जस्टिस माहेश्वरी द्वारा लिखे गए फैसले में यह माना गया कि आंध्र प्रदेश से उत्तर प्रदेश तक गैस की आवाजाही बिक्री के अनुबंध का एक अभिन्न हिस्सा थी। इसलिए यह केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम की धारा 3(a) के तहत 'अंतर-राज्यीय बिक्री' की कसौटी पर खरी उतरती है, क्योंकि इस बिक्री के कारण ही माल की आवाजाही राज्य की सीमाओं के पार हुई थी।

कोर्ट ने टिप्पणी की,

“यदि किसी बिक्री को तकनीकी रूप से धारा 4(2) के 'स्थान-निर्धारण' (situs) परीक्षणों के तहत किसी विशेष राज्य के 'अंदर' हुई बिक्री माना जाता है, लेकिन यदि वही बिक्री साथ ही साथ माल की आवाजाही को राज्य की सीमाओं के पार भी ले जाती है तो धारा 3 को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य इसे अपने सामान्य बिक्री कर कानूनों के तहत पूरी तरह से 'स्थानीय' (राज्य के भीतर हुई) बिक्री के रूप में कर के दायरे में नहीं ला सकता।”

कोर्ट ने 'स्टेट ऑफ़ आंध्र प्रदेश बनाम NTPC, (2002) 5 SCC 203' मामले में संविधान पीठ के फैसले पर काफी हद तक भरोसा किया, जिसमें अंतर-राज्यीय बिक्री के तीन आवश्यक तत्व निर्धारित किए गए:

(i) बिक्री का एक अनुबंध होना चाहिए, जिसमें माल की अंतर-राज्यीय आवाजाही के संबंध में कोई शर्त—चाहे वह स्पष्ट हो या निहित—शामिल हो।

(ii) माल वास्तव में एक राज्य से दूसरे राज्य में जाना चाहिए, और यह आवाजाही बिक्री के उस अनुबंध के अनुसार होनी चाहिए, जिसमें बिक्री ही इस आवाजाही का मुख्य कारण हो।

(iii) माल की यह आवाजाही एक राज्य से दूसरे उस राज्य तक होनी चाहिए, जहाँ बिक्री पूरी होती है।

इस रूपरेखा को लागू करते हुए खंडपीठ ने पाया कि GSPA (गैस बिक्री और खरीद समझौता) में स्पष्ट रूप से आंध्र प्रदेश से उत्तर प्रदेश तक गैस की आवाजाही की परिकल्पना की गई। अनुबंधों के अनुसार गैस को भौतिक रूप से राज्य की सीमाओं के पार ले जाया गया था; और स्वामित्व तथा जोखिम गादिमोगा, आंध्र प्रदेश में ही खरीदारों को हस्तांतरित हो गए।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि GSPA के तहत “सुपुर्दगी बिंदु” (Delivery Point) को स्पष्ट रूप से गादिमोगा स्थित 'आउटलेट फ्लैंज' के रूप में पहचाना गया, और एक बार वहां सुपुर्दगी हो जाने के बाद विक्रेता की जवाबदेही समाप्त हो गई थी।

कोर्ट ने US सुप्रीम कोर्ट के केस का हवाला दिया

कोर्ट ने अपने तर्क के समर्थन में US सुप्रीम कोर्ट के एक पहले के फैसले पीपल्स नेचुरल गैस कंपनी बनाम पब्लिक सर्विस कमीशन (270 U.S. 550, 1926) का भी सहारा लिया। कोर्ट का तर्क था कि बिक्री उसी जगह पूरी हुई जहां माल की सप्लाई हुई, यानी आंध्र प्रदेश (AP) राज्य में; इस तरह यह माल की एक अंतर-राज्यीय आवाजाही बन गई, जिसके चलते उत्तर प्रदेश (UP) राज्य द्वारा VAT की मांग करना अनुचित ठहरा।

आगे कहा गया,

“सहमत डिलीवरी पॉइंट पर कस्टडी और मालिकाना हक का हस्तांतरण बिना गैस की उसके अंतिम गंतव्य तक की आवाजाही को रोके हुए इस सौदे का कानूनी रूप से प्रभावी क्षण माना जाता है। इसके बाद गैस को एक कॉमन पाइपलाइन में डालना, जिसमें दूसरे स्रोतों से आने वाली गैस के साथ उसका अनिवार्य रूप से भौतिक रूप से मिल जाना भी शामिल है, पहले से पूरी हो चुकी बिक्री के स्वरूप को न तो बदलता है और न ही उसे किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करता है।”

अंततः, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा दायर सभी अपीलों को खारिज किया और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें VAT मूल्यांकन के आदेशों को रद्द किया गया था।

Cause Title: STATE OF UTTAR PRADESH & ORS. VERSUS RELIANCE INDUSTRIES LIMITED & ORS. (with connected cases)

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