जरूरी पक्षकारों को शामिल किए बिना और तथ्य छुपाकर लिया गया प्रोबेट रद्द होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि यदि किसी वसीयत (Will) का प्रोबेट जरूरी पक्षकारों को शामिल किए बिना और महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाकर प्राप्त किया गया हो, तो उसे रद्द (revoked) किया जा सकता है।
जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का मृतक की संपत्ति में थोड़ा भी हित (interest) हो, उसे प्रोबेट कार्यवाही में सुना जाना जरूरी है।
मामले का विवरण
मामला कोयंबटूर की एक संपत्ति से जुड़ा है, जिसे एक व्यक्ति ने 1976 में अपनी बेटी के पक्ष में वसीयत के जरिए देने का दावा किया गया था। हालांकि, वसीयत के बाद उसी वर्ष उस संपत्ति को रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए बेच दिया गया।
बाद में अपीलकर्ता (subsequent purchasers) ने 1997 में यह संपत्ति खरीदी। इसके बावजूद, संबंधित महिला (प्रतिवादी) ने 2009 में बिना अपने भाइयों और संपत्ति के खरीदारों को पक्षकार बनाए, एकतरफा (ex parte) प्रोबेट हासिल कर लिया।
विवाद और कानूनी प्रक्रिया
अपीलकर्ताओं ने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 263 के तहत प्रोबेट रद्द करने की मांग की, जिसे जिला अदालत ने स्वीकार कर लिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस आदेश को पलट दिया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने कहा—
जिन लोगों का संपत्ति में हित है, उन्हें प्रोबेट कार्यवाही में नोटिस देना अनिवार्य है
प्रतिवादी ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया, खासकर संपत्ति की बिक्री और अन्य वारिसों की जानकारी
प्रोबेट याचिका में इन तथ्यों को छुपाया गया, जबकि समानांतर सिविल मुकदमे में उनका उल्लेख किया गया था
कोर्ट ने इसे “जानबूझकर तथ्य छुपाना” माना।
अदालत का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि—
प्रोबेट आदेश जरूरी पक्षकारों को शामिल किए बिना और तथ्य छुपाकर प्राप्त किया गया
इसलिए जिला अदालत द्वारा प्रोबेट रद्द करने का फैसला सही था
कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए जिला अदालत के फैसले को बहाल कर दिया।