सलवार उतारने की कोशिश और छाती दबाना 'रेप का प्रयास' नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर लिया स्वतः संज्ञान
पटना हाईकोर्ट के उस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लिया है, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसकी छाती दबाकर कथित रूप से छेड़छाड़ करने के आरोपों को बलात्कार के प्रयास (Attempt to Rape) का अपराध नहीं माना गया था। Live Law
चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में कुछ टिप्पणियां आपत्तिजनक (offending observations) हैं।
CJI ने बिहार के एडवोकेट जनरल एस.डी. संजय से कहा कि आरोपी को नोटिस की तामील सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि आरोपी को सुने बिना उसके खिलाफ आदेश को रद्द नहीं किया जा सकता।
पटना हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
पटना हाईकोर्ट के सामने मामला ऐसे आरोपों से जुड़ा था, जिनमें आरोपी पर महिला की सलवार उतारने की कोशिश करने और उसकी छाती दबाकर शारीरिक रूप से छेड़छाड़ करने का आरोप था।
हाईकोर्ट ने कहा था कि केवल इन आरोपों के आधार पर, जब तक penetration या बलात्कार करने के इरादे को स्पष्ट रूप से स्थापित करने वाला कोई overt act सामने न हो, इसे बलात्कार के प्रयास का अपराध नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने माना था कि आरोप, अधिक से अधिक, महिला की मर्यादा भंग करने (outraging the modesty of a woman) से संबंधित अपराध की ओर संकेत करते हैं।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने IPC की धारा 376 सहपठित धारा 511 के तहत दर्ज दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था। Live Law
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लिया स्वतः संज्ञान?
यह मामला उस समय सुप्रीम कोर्ट के सामने आया जब एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने पटना हाईकोर्ट के इस फैसले की ओर पीठ का ध्यान आकर्षित किया।
यह सुनवाई उस स्वतः संज्ञान मामले से जुड़ी थी जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले की समीक्षा की थी। उस मामले में नाबालिग लड़की के स्तन दबाने, उसके पायजामे की डोरी तोड़ने और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश को हाईकोर्ट ने बलात्कार के प्रयास के बजाय तैयारी (preparation) की श्रेणी में माना था। Science and Technology Department
सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उस इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था और यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण में संवेदनशीलता और करुणा को लेकर दिशानिर्देश तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। Science and Technology Department
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा—
“कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां हैं।”
हालांकि, CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को सुने बिना हाईकोर्ट के फैसले को सीधे रद्द नहीं किया जा सकता।
उन्होंने बिहार के एडवोकेट जनरल से कहा कि स्थानीय पुलिस के माध्यम से आरोपी को नोटिस की तामील सुनिश्चित की जाए।
यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों की सुनवाई के दौरान न्यायिक संवेदनशीलता और पीड़ितों के प्रति उचित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया है।
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले में हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए यौन अपराधों और अन्य संवेदनशील मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण में संवेदनशीलता और करुणा विकसित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया था। Science and Technology Department
अब पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह भी देखा जाएगा कि हाईकोर्ट की संबंधित टिप्पणियों और अपराध की कानूनी व्याख्या को किस तरह देखा जाना चाहिए।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने BCI को नहीं, बल्कि संबंधित आरोपी को नोटिस की तामील सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है और आगे की सुनवाई के बाद ही मामले पर अंतिम निर्णय होगा।