एल्विश यादव को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने 'स्नेक वेनम' मामले में FIR रद्द की, नई शिकायत की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर एल्विश यादव को बड़ी राहत देते हुए कथित स्नेक वेनम मामले में दर्ज FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द की। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित प्राधिकरण कानून के अनुसार नई शिकायत दर्ज कर सकता है।
जस्टिस एम. एम. सुंद्रेश और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में कानूनी आधारों पर एफआईआर टिक नहीं पाती।
अदालत ने दो मुख्य पहलुओं पर विचार किया पहला, मादक द्रव्य कानून (NDPS Act) की धाराओं का लागू होना और दूसरा, वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्यवाही की वैधता।
NDPS Act के संदर्भ में अदालत ने पाया कि जिस पदार्थ (सांप के जहर से जुड़ा एंटीडोट) का जिक्र किया गया, वह कानून की सूची में शामिल नहीं है। साथ ही एल्विश यादव के पास से कोई बरामदगी भी नहीं हुई। इस आधार पर अदालत ने माना कि NDPS Act का प्रयोग इस मामले में उचित नहीं है।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत अदालत ने कहा कि धारा 55 के अनुसार मुकदमा केवल अधिकृत अधिकारी द्वारा दायर शिकायत के आधार पर ही शुरू किया जा सकता है। इस मामले में शिकायत एक निजी व्यक्ति द्वारा दी गई थी जो कानून के अनुरूप नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत लगाए गए आरोप भी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं होते।
इन सभी कारणों से सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द की, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के तथ्यों पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा,
“हम किसी को क्लीन चिट नहीं दे रहे हैं। यदि कोई अपराध हुआ है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।”
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाइकोर्ट ने पहले एल्विश यादव की याचिका खारिज की थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक भी लगाई थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद संबंधित एजेंसियों के पास यह विकल्प खुला है कि वे उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए नया मामला दर्ज करें।