महिला आरक्षण पर BCI का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा प्रस्ताव, चुनाव हारने वाली सबसे ज्यादा वोट पाने वाली महिला उम्मीदवारों को मिले Co-option

Update: 2026-05-21 11:59 GMT

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दाखिल कर राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है।

BCI ने अदालत से अनुरोध किया है कि 30% महिला आरक्षण व्यवस्था के तहत अतिरिक्त 10% सह-नामांकन (Co-option) सीटों पर उन महिला उम्मीदवारों को शामिल करने की अनुमति दी जाए, जो चुनाव में मामूली अंतर से हार गईं लेकिन सबसे अधिक वोट पाने वाली गैर-निर्वाचित महिला उम्मीदवार रहीं।

BCI ने कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और लोकतांत्रिक होगी क्योंकि सह-नामांकन किसी व्यक्तिपरक चयन के बजाय चुनाव में मिले वोटों के आधार पर किया जाएगा।

परिषद ने सुझाव दिया कि जहां 25 सदस्य चुने जाने हैं वहां छठे और सातवें स्थान पर रहीं महिला उम्मीदवारों को, 20 सदस्यीय परिषद में पांचवें और छठे स्थान वाली उम्मीदवारों को, तथा 15 सदस्यीय परिषद में चौथे स्थान वाली महिला उम्मीदवार को सह-नामित किया जाए।

BCI का कहना है कि इससे पक्षपात, भेदभाव या मनमाने चयन के आरोपों से बचा जा सकेगा और महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने का संवैधानिक उद्देश्य भी पूरा होगा।

आवेदन में कहा गया है कि यह व्यवस्था अधिवक्ता समुदाय द्वारा दिए गए जनादेश के अनुरूप होगी क्योंकि सह-नामांकन उन्हीं उम्मीदवारों में से होगा जिन्हें चुनाव में पर्याप्त समर्थन मिला है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष दिसंबर में राज्य बार काउंसिल चुनावों में 30% महिला आरक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि पर्याप्त महिला उम्मीदवार निर्वाचित नहीं हो पाती हैं तो 10% सीटें सह-नामांकन के जरिए भरी जा सकती हैं।

इसके बाद 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति को यह तय करने का निर्देश दिया था कि महिलाओं के 10% सह-नामांकन की प्रक्रिया किस प्रकार अपनाई जाए।

BCI ने अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा है कि वह अदालत द्वारा सुझाए गए विकल्प का समर्थन करता है, जिसके तहत चुनाव लड़ चुकीं और सर्वाधिक वोट पाने वाली लेकिन निर्वाचित न हो सकीं महिला उम्मीदवारों को सह-नामित किया जाए।

बार काउंसिल ने कहा कि यह तरीका लोकतांत्रिक इच्छा का सम्मान करने के साथ-साथ राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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