अनुच्छेद 32 का बढ़ता दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय: सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-01-16 11:42 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उन याचिकाओं पर कड़ी नाराज़गी जताई, जिनमें लंबित मामलों के बावजूद सीधे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अदालत का रुख किया जा रहा है। कोर्ट ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र का घोर दुरुपयोग करार दिया।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने अनुच्छेद 32 के तहत दायर एक रिट याचिका खारिज करते हुए कहा कि उसी विषय से जुड़ा मामला पहले से ही बॉम्बे हाइकोर्ट में लंबित है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने अनुच्छेद 32 के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की याचिकाओं की संख्या तेजी से बढ़ी और अब तो मामूली बातों, यहां तक कि स्थगन (adjournment) जैसे मुद्दों के लिए भी लोग सीधे सुप्रीम कोर्ट आ रहे हैं।

जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की,

“अनुच्छेद 32 का दुरुपयोग हो रहा है। हर बात पर, एक स्थगन के लिए भी, अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर दी जाती है।”

उन्होंने यह भी कहा,

“दिल्ली के आसपास के लोग अनुच्छेद 32 की याचिकाएं दायर कर रहे हैं। यह क्या है? यह दुरुपयोग है।”

इस पर जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा,

“अनुच्छेद 32 नागरिकों के लिए है।”

जस्टिस नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि जब कोई मामला पहले से हाइकोर्ट में लंबित है तब अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करना दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।

जब याचिकाकर्ता के वकील ने हाइकोर्ट जाने की अनुमति मांगी, तो जस्टिस नागरत्ना ने कहा,

“सुप्रीम कोर्ट से सलाह मत लीजिए। जहां जाना है, वहां जाकर आवेदन दाखिल कीजिए। हमने आपकी कोई स्वतंत्रता छीनी नहीं है।”

अपने आदेश में पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि यह याचिका अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

कोर्ट ने आदेश दिया,

“अनुच्छेद 32 के तहत दायर यह याचिका इस न्यायालय और कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है। अतः इसे खारिज किया जाता है।”

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