पूर्व सैनिक की लाइसेंसी राइफल लौटाने का आदेश, जब्ती जारी रहने से आजीविका प्रभावित होगी: राजस्थान हाईकोर्ट

Update: 2026-06-26 12:33 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक की लाइसेंसी 12 बोर राइफल उसे वापस सौंपने का आदेश देते हुए कहा कि वर्तमान में वह सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत है और यह राइफल उसके रोजगार का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में राइफल को लंबे समय तक जब्त रखना उसकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह आदेश पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता सेना से सेवानिवृत्त हैं और उनके नाम पर विधिवत लाइसेंसी राइफल है।

याचिकाकर्ता के खिलाफ रंगदारी मांगने के आरोप में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने उनकी राइफल जब्त की थी। मुकदमे के लंबित रहने के दौरान उन्होंने राइफल वापस देने की मांग की ताकि वह अपने शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण करा सकें।

हालांकि, सेशन कोर्ट ने यह कहते हुए उनका आवेदन खारिज किया कि कथित अपराध में इसी राइफल का इस्तेमाल हुआ हो सकता है। इसके बाद उन्होंने हाइकोर्ट का रुख किया।

राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि राइफल कथित अपराध में इस्तेमाल हुई हो सकती है, इसलिए साक्ष्य के तौर पर उसकी आवश्यकता पड़ेगी।

दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में राइफल को पुलिस अभिरक्षा में रखने की अब कोई आवश्यकता नहीं है।

अदालत ने यह भी कहा कि राइफल के कथित अपराध में इस्तेमाल होने की आशंका केवल अनुमान पर आधारित है और रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा,

“केवल FIR दर्ज हो जाने मात्र से यह मान लेने का कोई आधार नहीं बनता कि याचिकाकर्ता भविष्य में इस राइफल का इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधि में करेगा, विशेषकर तब, जब उसके खिलाफ किसी अन्य आपराधिक मामले का कोई रिकॉर्ड नहीं है।”

अदालत ने यह भी माना कि मुकदमे के निपटारे में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में यदि राइफल लंबे समय तक पुलिस के कब्जे में रही तो उसके खराब होने की आशंका रहेगी। मूल्यवान संपत्ति को अनिश्चितकाल तक पुलिस अभिरक्षा में रखना उचित नहीं है, जबकि उसके आवश्यक विवरण और पहचान संबंधी रिकॉर्ड साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील पर भी गौर किया कि लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए राइफल प्रस्तुत करना आवश्यक है। यदि राइफल वापस नहीं मिली तो लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हो सकेगा और उन्हें पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ेगी, जिससे अनावश्यक कठिनाई होगी।

अदालत ने कहा,

“यह अदालत इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं कर सकती कि याचिकाकर्ता एक रिटायर पूर्व सैनिक है, जो देश की सेवा करने के बाद वर्तमान में बैंक और सौर ऊर्जा परियोजना में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्य कर रहा है। उसके लिए यह राइफल केवल शौक की वस्तु नहीं, बल्कि उसके पेशे और आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण साधन है।”

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस को याचिकाकर्ता की लाइसेंसी राइफल वापस सौंपने का निर्देश दिया।

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