क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए गवाह को दोबारा बुलाने से इनकार करने वाला आदेश अंतरिम, उसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका नहीं चलेगी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए गवाह को दोबारा तलब करने संबंधी आवेदन खारिज करने का आदेश अंतरिम प्रकृति का होता है। ऐसे आदेश के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 397 के तहत पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह फैसला सुनाते हुए पुनरीक्षण अदालत के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें चेक अनादरण के एक मामले में आरोपी को शिकायतकर्ता से दोबारा क्रॉस एग्जामिनेशन करने की अनुमति दी गई।
मामले में याचिकाकर्ता ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का बयान दर्ज होने के बाद आरोपी को जिरह के लिए कई अवसर दिए गए लेकिन उसने उनका उपयोग नहीं किया। इसके बाद आरोपी ने CrPC की धारा 311 के तहत आवेदन देकर शिकायतकर्ता को दोबारा जिरह के लिए बुलाने की मांग की।
ट्रायल कोर्ट ने यह आवेदन खारिज कर दिया। इसके खिलाफ आरोपी ने पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे पुनर्विचार अदालत ने स्वीकार करते हुए शिकायतकर्ता से क्रॉस एग्जामिनेशन की अनुमति दी।
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि धारा 311 के तहत आवेदन खारिज करने का आदेश अंतिम नहीं बल्कि अंतरिम आदेश है। इसलिए उसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं थी।
हाईकोर्ट ने इस दलील से सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट के सेतुरामन बनाम राजमणिक्कम फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि धारा 311 के तहत आवेदन खारिज करने का आदेश अंतरिम आदेश होता है और धारा 397(2) के तहत ऐसे आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका पर रोक है।
अदालत ने कहा कि धारा 397(2) का स्पष्ट प्रावधान है कि किसी अपील, जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान पारित अंतरिम आदेश के विरुद्ध पुनर्विचार की शक्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता।
इन्हीं कारणों से राजस्थान हाईकोर्ट ने पुनर्विचार अदालत का आदेश रद्द करते हुए याचिका स्वीकार की।