राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के रेप केस में आसाराम की अंतरिम ज़मानत 25 मई तक बढ़ाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार (29 अप्रैल) को आसाराम की अंतरिम ज़मानत 25 मई तक या उस तारीख तक बढ़ाई, जिस तारीख को कोर्ट रेप केस में उनकी सज़ा को चुनौती देने वाली उनकी क्रिमिनल अपील पर फ़ैसला सुनाएगा - इन दोनों में से जो भी तारीख पहले हो।
बता दें, जोधपुर सेशंस कोर्ट ने अप्रैल 2018 में आसाराम को 2013 में अपने आश्रम में एक नाबालिग से रेप करने के आरोप में उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी।
एक्टिंग चीफ़ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की डिवीज़न बेंच ने अपने आदेश में कहा कि आसाराम की क्रिमिनल अपील पर फ़ैसला पहले ही एक दूसरी डिवीज़न बेंच ने सुरक्षित रख लिया है।
इसलिए बेंच ने कहा:
"इस बात को ध्यान में रखते हुए कि फ़ैसला 20.04.2026 को सुरक्षित रख लिया गया और लिखित दलीलें भी पेश की जा चुकी हैं, हमने अपने 29.10.2025 के आदेश में जो शर्तें तय की थीं, उन्हीं शर्तों के तहत - जो इस आदेश पर भी लागू होंगी - हम अपनी ज़मानत का आदेश एक और महीने के लिए बढ़ा रहे हैं, यानी 25.05.2026 तक या उस तारीख तक जब डिवीज़न बेंच फ़ैसला सुनाएगी - इन दोनों में से जो भी तारीख पहले हो।"
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर, 2025 को आसाराम की मेडिकल हालत को देखते हुए उन्हें छह महीने की अंतरिम ज़मानत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि आसाराम "वेजिटेटिव हालत" (बेहोशी जैसी हालत) में हैं और जेल में उनके इलाज के लिए ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
बुधवार को सुनवाई के दौरान, आसाराम की तरफ़ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने कोर्ट को बताया कि इस कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने अपील पर अंतिम सुनवाई पूरी कर ली है और फ़ैसला सुरक्षित रख लिया। अपील करने वाले की तरफ़ से लिखित दलीलें भी जमा कर दी गईं। उन्होंने कोर्ट को याद दिलाया कि हाईकोर्ट ने उन्हें सज़ा निलंबित करने के लिए नई अर्ज़ी दाख़िल करने की इजाज़त दी थी - अगर किसी वजह से छह महीने के अंदर अपील पर सुनवाई पूरी नहीं हो पाती।
कामत ने कहा कि अपील करने वाले ने छह महीने के अंदर ही केस पर अपनी अंतिम दलीलें पेश कीं, लेकिन फ़ैसला सुनाने में कुछ समय लग सकता है। उन्होंने गुज़ारिश की कि इस दौरान, हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम ज़मानत को जारी रखा जाए। इस बीच राज्य की ओर से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल दीपक चौधरी ने अपीलकर्ता की दलीलों का विरोध किया। हालांकि, यह निवेदन किया गया कि यदि हाईकोर्ट सहमत है तो अंतरिम ज़मानत का विस्तार एक महीने से अधिक की अवधि के लिए नहीं होना चाहिए।
अतः न्यायालय ने आदेश पारित किया और सज़ा के निलंबन/अंतरिम ज़मानत के विस्तार के लिए दायर आवेदन का निपटारा किया।
Case title: Asharam @ Ashumal v/s State of Rajasthan