प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए काम पर रखे गए क्लास-IV कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने से इनकार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से काम पर रखे गए और विभिन्न क्लास-IV पदों पर काम कर रहे कर्मचारी, सरकारी क्लास-IV कर्मचारियों के लिए लागू न्यूनतम वेतनमान का लाभ पाने के हकदार हैं।
जस्टिस कुलदीप माथुर की बेंच ने 'धरिया बनाम राजस्थान राज्य' मामले में एक अन्य बेंच द्वारा दिए गए आदेश का हवाला दिया। उस मामले में इसी तरह की स्थिति वाले कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया गया।
बता दें, कोर्ट उन कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए 'ट्राइबल एरिया डेवलपमेंट डिपार्टमेंट' (आदिवासी क्षेत्र विकास विभाग) में विभिन्न क्लास-IV पदों पर काम कर रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें क्लास-IV कर्मचारियों के लिए लागू न्यूनतम वेतनमान का लाभ इसलिए नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि उन्हें प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से काम पर रखा गया।
प्रतिवादी (राज्य सरकार) के वकील ने दलील दी कि चूंकि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति किसी नियमित चयन प्रक्रिया के जरिए नहीं, बल्कि प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से हुई है, इसलिए वे न्यूनतम वेतनमान के लाभ का दावा नहीं कर सकते।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 'धरिया बनाम राजस्थान राज्य' मामले का जिक्र करते हुए कहा:
"...इसी तरह की स्थिति वाले एक कर्मचारी द्वारा दायर रिट याचिका को इस कोर्ट की एक अन्य बेंच पहले ही स्वीकार कर चुकी है। कोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ताओं को प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए रखे जाने और नियमित चयन प्रक्रिया से न चुने जाने के मुद्दे पर उस फैसले में पहले ही विचार किया जा चुका है।"
इसके बाद कोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार कीं और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 60 दिनों के भीतर जरूरी आदेश जारी करे, ताकि याचिकाकर्ताओं को क्लास-IV कर्मचारियों के लिए लागू न्यूनतम वेतनमान का लाभ मिल सके।
Case Title : Sunil Katara v State of Rajasthan & Ors., and other connected petition