बिना लाइसेंस के या दो सवारी के साथ बाइक चलाने पर तब तक 'सहयोगी लापरवाही' नहीं मानी जाएगी, जब तक उसका सीधा संबंध दुर्घटना से न हो: राजस्थान हाईकोर्ट

Update: 2026-04-14 15:51 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिना वैध लाइसेंस के और दो सवारी (पिलियन राइडर्स) के साथ मोटरसाइकिल चलाना भले ही मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन हो, लेकिन ये काम अपने आप में दुर्घटना में मृतक की 'सहयोगी लापरवाही' (Contributory Negligence) मानने का आधार नहीं हो सकते, जब तक कि इस बारे में कोई खास निष्कर्ष न हो।

जस्टिस संदीप तनेजा ने आगे कहा कि चूंकि मृतक एक नाई था, इसलिए उसकी मासिक आय की गणना 'कुशल श्रमिक' (Skilled Worker) के न्यूनतम वेतन के आधार पर की जानी चाहिए, न कि एक 'अकुशल श्रमिक' (Unskilled Worker) के आधार पर; क्योंकि न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के तहत राज्य सरकार ने नाई को एक कुशल श्रमिक माना है।

कोर्ट मोटर वाहन दुर्घटना न्यायाधिकरण (Motor Vehicle Accidents Tribunal) द्वारा दिए गए मुआवजे के दावे के खिलाफ दावा करने वालों की अपील पर सुनवाई कर रहा था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह तर्क दिया गया कि न्यायाधिकरण ने मृतक की ओर से 20% 'सहयोगी लापरवाही' मानने में गलती की, सिर्फ इसलिए कि वह बिना वैध लाइसेंस के और दो सवारियों के साथ बाइक चला रहा था।

इसके अलावा, यह भी कहा गया कि चूंकि मृतक एक नाई था, इसलिए उसकी मासिक आय का आकलन कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि एक अकुशल श्रमिक के आधार पर।

तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 'सुधीर कुमार राणा बनाम सुरिंदर सिंह और अन्य' मामले का हवाला दिया। इस मामले में यह फैसला दिया गया कि अगर इस बात का कोई खास निष्कर्ष नहीं है कि घायल व्यक्ति लापरवाही से या तेज गति से बाइक चला रहा था तो सिर्फ बाइक चलाते समय वैध लाइसेंस न होना ही उसे 'सहयोगी लापरवाही' का दोषी ठहराने का आधार नहीं हो सकता।

इसके अलावा, 'मोहम्मद सिद्दीकी और अन्य बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और अन्य' मामले का भी हवाला दिया गया। इस मामले में यह फैसला दिया गया कि अगर बाइक पर दो से ज़्यादा लोग बैठे हैं तो जब तक यह साबित न हो जाए कि इस वजह से दुर्घटना हुई या उसका असर पड़ा, तब तक उन्हें 'सहयोगी लापरवाही' के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

इस पृष्ठभूमि में, कोर्ट ने न्यायाधिकरण के एक खास निष्कर्ष पर जोर दिया। इस निष्कर्ष के अनुसार, दुर्घटना जीप चालक की लापरवाही के कारण हुई। इसमें मृतक की ओर से किसी भी तरह की लापरवाही नहीं थी।

इस संदर्भ में, न्यायालय ने यह राय व्यक्त की,

"...इस निष्कर्ष पर पहुंचने के बावजूद कि दुर्घटना में मृतक की कोई गलती नहीं थी, माननीय ट्रिब्यूनल ने उस पर 'सहयोगी लापरवाही' (Contributory Negligence) का आरोप केवल इसलिए लगाया, क्योंकि उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और वह मोटरसाइकिल पर दो अन्य सवारों (Pillion Riders) के साथ यात्रा कर रहा था... इस न्यायालय का यह मत है कि माननीय ट्रिब्यूनल द्वारा मृतक को सहयोगी लापरवाही के लिए उत्तरदायी ठहराना उचित नहीं था।"

अतः, ट्रिब्यूनल का वह आदेश, जिसमें मृतक पर 20% सहयोगी लापरवाही का आरोप लगाया गया, रद्द किया। इसके अतिरिक्त, इस बात पर सहमति बनी कि 'न्यूनतम मजदूरी अधिनियम' (Minimum Wages Act) के अंतर्गत राज्य सरकार ने एक नाई (Barber) को 'कुशल श्रमिक' (Skilled Labourer) के रूप में मान्यता दी।

तदनुसार, ट्रिब्यूनल द्वारा दी गई मुआवज़े की राशि में वृद्धि की गई और याचिका का निपटारा किया गया।

Title: Smt. Pushpa & Anr. v Hemraj & Anr.

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