स्थायी रूप से दिव्यांग कर्मचारियों के परिजनों के लिए अनुकंपा नियुक्ति लागू, भले ही दुर्घटना नियमों के लागू होने से पहले हुई हो: राजस्थान हाईकोर्ट

Update: 2026-05-25 06:20 GMT

राजस्थान हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि 'राजस्थान स्थायी पूर्ण विकलांग सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति नियम, 2023' के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन पर विचार करते समय दुर्घटना की तारीख का कोई महत्व नहीं है, बशर्ते नियमों के लागू होने की तारीख पर स्थायी पूर्ण विकलांगता की स्थिति मौजूद हो।

जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने टिप्पणी की कि यह नियम ऐसे मामलों पर विचार करने से मना नहीं करता, जिनमें स्थायी पूर्ण विकलांगता का कारण बनी दुर्घटना, नियमों के लागू होने की तारीख से पहले हुई हो।

"कोर्ट का मानना ​​है कि प्रतिवादी (विभाग) ऐसे मनगढ़ंत आधार उठाकर याचिकाकर्ता के साथ भेदभाव नहीं कर सकते, जो 2023 के नियमों के तहत उपलब्ध नहीं हैं। नियमों में कहीं भी स्पष्ट रूप से ऐसे मामलों पर विचार करने से मना नहीं किया गया, जिनमें दुर्घटना नियमों के लागू होने की तारीख से पहले हुई हो।"

कोर्ट एक ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसके पिता पशुपालन विभाग में कार्यरत थे। 2021 में हुई एक दुर्घटना के कारण उन्हें 85% स्थायी विकलांगता हो गई और वे कोमा में चले गए।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने नियमों के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, जिसे विभाग ने इस आधार पर खारिज किया कि याचिकाकर्ता के पिता की दुर्घटना नियमों के लागू होने से पहले हुई। इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई।

यह तर्क दिया गया कि नियमों को लागू करने के लिए दुर्घटना की तारीख प्रासंगिक नहीं है। चूंकि नियमों के लागू होने की तारीख पर याचिकाकर्ता के पिता स्थायी रूप से विकलांग व्यक्ति थे, इसलिए नियम उन पर लागू होते हैं।

विभाग ने इस बात का विरोध करते हुए तर्क दिया कि नियम केवल उन्हीं मामलों में लागू होते हैं, जिनमें दिव्यांगता नियमों के लागू होने के बाद हुई हो। विभाग ने यह भी बताया कि कार्मिक विभाग ने भी इसी स्थिति का समर्थन किया।

तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने टिप्पणी की कि नियमों की धारा 2(f) में "स्थायी पूर्ण विकलांग सरकारी कर्मचारियों" को परिभाषित किया गया। इस परिभाषा में उन लोगों के बीच कोई अंतर नहीं किया गया, जो नियमों के लागू होने की तारीख से पहले विकलांग हुए हों या उसके बाद।

इसके अलावा, नियम 5, जो कुछ शर्तों के अधीन नियुक्ति से संबंधित है, वह भी दुर्घटना की तारीख के संबंध में विचार करने में कोई अंतर पैदा नहीं करता। इसमें बस यह प्रावधान था कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना के कारण स्थायी विकलांगता हो जाती है तो नियमों के तहत मिलने वाला लाभ उसे मिलेगा।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विभाग की व्याख्या ने नियमों के उद्देश्य और प्रयोजन को ही विफल किया, जिसका मकसद संबंधित सरकारी कर्मचारी के परिवार को आर्थिक और सामाजिक सहायता प्रदान करना था।

“एक बार जब नियमों के लागू होने की तारीख पर स्थायी पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति मौजूद हो और कर्मचारी सेवा में बना रहे, लेकिन उसे मेडिकल रूप से अयोग्य घोषित कर दिया जाए तो केवल इस आधार पर विचार करने से इनकार करना कि दुर्घटना नियमों के लागू होने से पहले हुई, नियमों में एक ऐसी शर्त जोड़ने जैसा होगा, जिसे नियम बनाने वाले प्राधिकारी ने स्वयं जान-बूझकर शामिल नहीं किया।”

आगे यह भी कहा गया कि लाभकारी और कल्याणकारी कानूनों की व्याख्या उदारतापूर्वक की जानी चाहिए ताकि उनके उद्देश्य को आगे बढ़ाया जा सके, न कि अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाकर उन्हें विफल किया जाए।

तदनुसार, याचिका स्वीकार की गई और प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया कि वे दुर्घटना की तारीख पर विचार किए बिना याचिकाकर्ता के आवेदन पर पुनर्विचार करें।

Title: Karan Pratap Singh v State of Rajasthan & Ors.

Tags:    

Similar News